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Air Pollution: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता, जानिए राजधानी में कितना बढ़ा एक्यूआई?

Air Pollution: बढ़ते वायु प्रदूषण ने एक बार फिर से सरकार की टेन्सन को बढ़ा दिया है. बता दें कि दिल्ली नोएडा और गुरुग्राम बहुत ही खराब से खराब वायु गुणवत्ता की गिरफ्त में है. यहां पर वायु गुणवत्ता सूंचकांक (एक्यूआई) 221 से 341 के बीच है. जो की एनसीआर वालों के लिए खतरनाक साबित […]

Calendar Last Updated : 29 October 2023, 05:08 PM IST
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Air Pollution: बढ़ते वायु प्रदूषण ने एक बार फिर से सरकार की टेन्सन को बढ़ा दिया है. बता दें कि दिल्ली नोएडा और गुरुग्राम बहुत ही खराब से खराब वायु गुणवत्ता की गिरफ्त में है. यहां पर वायु गुणवत्ता सूंचकांक (एक्यूआई) 221 से 341 के बीच है. जो की एनसीआर वालों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. वहीं बढ़ते प्रदूषण पर प्रतिबंध लगाने के लिए 15-सूत्रीय शीतकालीन कार्य योजना के बावजूद, बिगड़ती वायु गुणवत्ता के खिलाफ अभियान जारी है.

इसमें ‘रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ’ जैसा अभियान पहली गति में हैं क्योंकि वाहनों और बायोमास (मरे हुए जीवों से प्राप्त पदार्थ) जलने से होने वाला उत्सर्जन पीएम2 2.5 के स्तर को बढ़ाने में योगदान देता है. वहीं दिल्ली के लिए वायु गुणवत्ता और मौसम बुलेटिन के अनुसार, 29 से 31 अक्टूबर, 2023 तक वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहने का अनुमान है.

दिल्ली में एक्यूआई

सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च इंडिया ( सफर) के अनुसार, आज राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई है. आज सुबह दिल्ली में एक्यूआई 309 दर्ज तक दर्ज किया गया. सफर द्वारा जारी नए आंकड़ों के अनुसार, सुबह के समय दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास हवा की गुणवत्ता 341 दर्ज की गई. वहीं आईआईटी क्षेत्र में ये गुणवत्ता 300 तक दर्ज की गई.

नोएडा और गुरुग्राम में इतना रहा एक्यूआई

इस बीच, नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 317 और गुरुग्राम में 221 तक दर्ज किया गया.

दिल्ली सरकार ने बढ़ते प्रदूषण पर लिया फैसला

वहीं इससे पहले शुक्रवार को दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए एक-एक कर 15 सूत्री शीतकालीन कार्ययोजना लागू की जा रही है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा पहले वाहनों, बायोमास जलने, धूल आदि से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए 15-सूत्रीय शीतकालीन कार्य योजना का एलान किया गया था. वहीं अब प्रदूषण को कम करने के लिए इस शीतकालीन कार्य योजना को एक-एक करके जमीन पर लागू किया जा रहा है.

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