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नई दिल्ली: भारत में इस समय मॉनसून का सबसे उग्र और विनाशकारी रूप देखने को मिल रहा है. पश्चिमी भारत के राज्यों, विशेषकर महाराष्ट्र और गुजरात में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. नदियां उफान पर हैं और बरसाती नाले उफनकर रिहायशी इलाकों में समा रहे हैं. जिससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो गई है. कई बाजारों में दुकानों के भीतर तक पानी भर चुका है, जिसके चलते सुरक्षा के लिहाज से स्कूल-कॉलेजों को बंद करना पड़ा है. इस तबाही के बीच, अब उत्तर भारत में भी मॉनसून की जोरदार बारिश आफत बनकर टूटने लगी है.
दफ्तर जाने वाले बेहाल
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने देश की राजधानी दिल्ली और उसके पड़ोसी राज्य हरियाणा में मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए 'रेड अलर्ट' जारी कर दिया है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों के भीतर इन क्षेत्रों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है. नेशनल हाईवे 24 पर अक्षरधाम मंदिर के पास वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं. एम्बिएंस मॉल के पास दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर गाड़ियों का रेंगना प्रशासनिक दावों की हकीकत बयां कर रहा है. नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के भी अलग-अलग इलाकों में मुख्य सड़कें पानी में डूब चुकी हैं.
दिल्ली-NCR की सड़कें बनीं तालाब
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में लगातार हो रही बारिश की वजह से जलभराव और भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या खड़ी हो गई है. सुबह-सुबह अपने काम और दफ्तर के लिए निकले कामकाजी लोगों को सड़कों पर घंटों जूझना पड़ रहा है. दिल्ली के आईटीओ (ITO), आनंद विहार, करोल बाग, कनॉट प्लेस, राजीव चौक, बॉटेनिकल गार्डन और डीएनडी (DND) फ्लाईओवर जैसे व्यस्ततम मार्गों पर गाड़ियों की रफ्तार पूरी तरह थम गई है.
साइबर सिटी गुरुग्राम का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल
देश की हाई-टेक 'साइबर सिटी' कहा जाने वाला गुरुग्राम इस मानसूनी बारिश में पूरी तरह बेबस नजर आया. गुरुग्राम की मुख्य सड़कें दरिया में तब्दील हो चुकी हैं और पानी का स्तर इतना ज्यादा है कि कई कारें बीच सड़क पर ही डूबकर बंद हो गईं. हीरो होंडा चौक से सुभाष चौक की ओर जाने वाली सड़क पर घुटनों तक पानी भरा हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी शहर का वही पुराना हाल है. नालियों और ड्रेनेज की खराब व्यवस्था, पुरानी कंक्रीट नालियों का कचरे से जाम होना और समय पर ड्रेनेज सिस्टम की मरम्मत न किए जाने की वजह से जरा सी बारिश में भी बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं.
गाजियाबाद में कागजी दावे बहे, मुख्य मार्ग डूबे
गाजियाबाद में भी मॉनसून की पहली ही तेज बारिश ने नगर निगम की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है. मॉनसून के आगमन से पहले नालों की मुस्तैद सफाई और जल निकासी के बड़े-बड़े दावे करने वाले अधिकारी इस बारिश में पूरी तरह बेनकाब हो गए हैं. रेलवे स्टेशन को नोएडा, ट्रांस हिंडन और इंदिरापुरम से जोड़ने वाले सबसे प्रमुख और व्यस्त मार्ग पर हालात सबसे ज्यादा खराब हैं. कुछ ही घंटों की बारिश में इस पूरी सड़क पर इतना पानी जमा हो गया कि वहां से गुजरने वाले वाहनों के पहिए आधे से ज्यादा डूब गए। पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए सड़क पार करना एक खतरनाक काम बन गया है. लोगों का सीधा आरोप है कि नगर निगम ने केवल फाइलों और बैठकों में तैयारियां पूरी दिखाईं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं किया गया.
उत्तराखंड के पहाड़ों पर संकट
मैदानी इलाकों के साथ-साथ पहाड़ों पर भी मॉनसून का प्रकोप जारी है. उत्तराखंड के लिए मौसम विभाग ने 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है. राजधानी देहरादून समेत प्रदेश के कई हिस्सों में देर रात से ही रुक-रुक कर भारी बारिश हो रही है. मौसम की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी जिलों में स्थानीय प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है. भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका के मद्देनजर एहतियात के तौर पर देहरादून और नैनीताल जिलों के सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है.