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महाकुंभ 2025: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संगम में किया स्नान, मुख्यमंत्री ने किया स्वागत

महाकुंभ नगर :  उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ-2025 के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई.  इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति का स्वागत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया. 

Calendar Last Updated : 10 February 2025, 03:18 PM IST
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महाकुंभ नगर :  उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ-2025 के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई.  इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति का स्वागत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया. 

हवाई अड्डे से संगम तक का सफर

राष्ट्रपति मुर्मू विशेष विमान से प्रयागराज हवाई अड्डे पर पहुंचीं, जहां उन्हें राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने गर्मजोशी से स्वागत किया. इसके बाद, वह अरैल घाट पहुंचीं और नाव से संगम के पवित्र जल में स्नान करने के लिए रवाना हो गईं. 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाव में राष्ट्रपति को गंगा और यमुना नदियों के प्रवाह और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी. नाव के रास्ते में, राष्ट्रपति ने संगम क्षेत्र में आए साइबेरियाई पक्षियों को भी दाना खिलाया, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता का प्रतीक हैं. 

संगम में पवित्र स्नान और पूजा

संगम में पवित्र स्नान के बाद, राष्ट्रपति ने गंगा नदी में नारियल और पुष्प अर्पित किए और सूर्यदेव को अर्घ्य दिया. इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू सफेद रंग के सलवार-सूट में नजर आईं. स्नान के बाद, उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगा आरती की और पूजन किया, जिससे वातावरण में एक दिव्य आस्था का संचार हुआ. 

महाकुंभ की अन्य गतिविधियाँ

राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी किए गए एक बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति मुर्मू महाकुंभ के इस मौके पर केवल संगम में ही नहीं, बल्कि अक्षयवट और बड़े हनुमान मंदिर में भी पूजा अर्चना करेंगी. इसके अलावा, वह डिजिटल महाकुंभ अनुभव केंद्र का भी दौरा करेंगी, जो महाकुंभ के धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव को प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रदर्शित करता है. 

ऐतिहासिक महत्व

महाकुंभ के इस पवित्र मौके पर राष्ट्रपति का संगम में स्नान करना एक ऐतिहासिक क्षण था, क्योंकि इससे पहले देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी महाकुंभ के दौरान संगम में स्नान कर चुके थे. यह प्रतीकात्मक रूप से भारतीय संस्कृति और आस्था की गहरी जड़ें दर्शाता है. 

महाकुंभ 2025 की इस खास यात्रा ने न केवल धार्मिक महत्व को प्रकट किया, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि को भी उजागर करता है. 

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