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नई दिल्ली: देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का कारण बने NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में अब जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. इस पूरे मामले में महाराष्ट्र का लातूर शहर जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गया है. सूत्रों के अनुसार, सीबीआई को शक है कि परीक्षा से पहले बड़ी रकम लेकर प्रश्नपत्र बेचे गए थे और इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था.
नांदेड़ में शुरुआती जांच के बाद अब एजेंसी ने अपना पूरा ध्यान लातूर और आसपास के शहरों पर केंद्रित कर दिया है. सीबीआई की टीम लगातार कई दिनों से लातूर में डेरा डाले हुए है और संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर रही है. जांच एजेंसी अब उन डॉक्टरों, शिक्षकों और एजेंटों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जिनके इस रैकेट से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है. मामले में कई बड़े नाम सामने आने की संभावना भी बताई जा रही है.
सूत्रों के मुताबिक, पुणे, लातूर, नांदेड़ और संभाजीनगर में फैले एजेंटों और कथित पेपर खरीदने वालों के नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है. जिन लोगों पर प्रश्नपत्र खरीदने या उसे आगे पहुंचाने का शक है, उन्हें सीबीआई की ओर से समन भेजे गए हैं. कई लोगों को पूछताछ के लिए पुणे बुलाया गया है.
सीबीआई की टीम पुणे और लातूर में लगातार छापेमारी कर रही है. कुछ दिन पहले पुणे के सुखसागर नगर इलाके से मनीषा वाघमारे नाम की महिला को गिरफ्तार किया गया था. वह एक ब्यूटी पार्लर चलाती है. जांच में सामने आया कि उसके बैंक खातों में परीक्षा से पहले कई खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी. एजेंसी को शक है कि वह इस पूरे नेटवर्क में बिचौलिये के रूप में काम कर रही थी.
जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ है. लातूर में हिरासत में लिए गए एक रिटायर्ड प्रोफेसर का नाम भी सामने आया है, जो दयानंद सागर कॉलेज से जुड़े रहे हैं. बताया जा रहा है कि वह उस टीम का हिस्सा थे जो NEET प्रश्नपत्र का मराठी अनुवाद कर रही थी. चूंकि NEET परीक्षा कई भाषाओं में आयोजित होती है, इसलिए प्रश्नपत्र के अनुवाद की प्रक्रिया बेहद गोपनीय मानी जाती है. लेकिन अब आशंका जताई जा रही है कि इसी दौरान पेपर बाहर पहुंचाया गया. सीबीआई इस एंगल पर गंभीरता से जांच कर रही है और कई अन्य प्रोफेसरों से भी पूछताछ की जा रही है.
लातूर को लंबे समय से मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग का बड़ा केंद्र माना जाता है. इसी शहर के एक कोचिंग संस्थान से इस पूरे मामले का खुलासा हुआ. बताया जा रहा है कि परीक्षा से दो दिन पहले आयोजित एक मॉक टेस्ट में ऐसे 42 सवाल पूछे गए थे, जो बाद में असली NEET पेपर में भी आए. जब परीक्षा हुई और वही सवाल सामने आए, तो कुछ अभिभावकों को शक हुआ. उन्होंने इसकी शिकायत स्थानीय पुलिस से की. मामला गंभीर होने के कारण जांच सीधे सीबीआई को सौंप दी गई. अब एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कोचिंग संस्थान और गिरफ्तार आरोपियों के बीच क्या संबंध थे.
जांच के दौरान राजस्थान और गुरुग्राम से जुड़े तार भी सामने आए हैं. आरोप है कि राजस्थान के आरोपी दिनेश बीवाल ने लीक प्रश्नपत्र की हार्ड कॉपी स्कैन करके डिजिटल रूप में आगे भेजी थी. बताया जा रहा है कि उसे यह पेपर गुरुग्राम निवासी यश यादव से मिला था. इसके बाद पेपर को अन्य छात्रों तक पहुंचाया गया और कथित तौर पर इसके बदले मोटी रकम वसूली गई. एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क के पैसों के लेन-देन और डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है.