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पुणे रेप केस : भीड़ भरा स्वारगेट बस स्टेशन, फिर भी अनसुनी हो गई पीड़िता की गुहार

पुणे के व्यस्त स्वारगेट बस स्टेशन से हर दिन 60 हजार यात्री महाराष्ट्र और अन्य राज्यों की ओर रवाना होते हैं. यहां से रोजाना 600 बसें संचालित होती हैं, लेकिन इसी भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर एक 26 वर्षीय पीड़िता के साथ सरकारी बस में दुष्कर्म हुआ, और कोई उसकी चीख तक नहीं सुन सका.

Calendar Last Updated : 27 February 2025, 10:04 PM IST
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पुणे के व्यस्त स्वारगेट बस स्टेशन से हर दिन 60 हजार यात्री महाराष्ट्र और अन्य राज्यों की ओर रवाना होते हैं. यहां से रोजाना 600 बसें संचालित होती हैं, लेकिन इसी भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर एक 26 वर्षीय पीड़िता के साथ सरकारी बस में दुष्कर्म हुआ, और कोई उसकी चीख तक नहीं सुन सका. यह सवाल उठता है कि आखिर इतने व्यस्त स्थान पर भी मदद की गुहार अनसुनी कैसे रह गई?

महाराष्ट्र में पुणे रेप केस इस वक्त चर्चा में है. विपक्षी दल फडणवीस सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि पुलिस अब तक आरोपी को पकड़ने में नाकाम रही है. उसे पकड़ने के लिए 13 टीमें जुटी हैं, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. पीड़िता का इलाज अस्पताल में जारी है. यह भयानक घटना पुणे के व्यस्ततम स्वारगेट बस स्टेशन पर एक सरकारी बस में हुई, जहां दुष्कर्म के बाद आरोपी फरार हो गया. लेकिन हिम्मत दिखाते हुए, पीड़िता ने सीधे स्वारगेट पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई. आइए जानते हैं स्वारगेट बस स्टेशन के बारे में, जहां यह दर्दनाक वारदात घटी.

पुणे का स्वारगेट बस स्टेशन दो निकटवर्ती बस स्टॉप से मिलकर बना है, जिसका संचालन महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) और पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (PMPML) द्वारा किया जाता है. यह स्टेशन पुणे के स्वारगेट इलाके में स्थित है, और इसके ठीक सामने ही स्वारगेट पुलिस स्टेशन मौजूद है.

2012 में बदली व्यवस्थाएं

पहले इस बस स्टेशन से रोजाना करीब 1800 बसें चलती थीं, लेकिन 2012 में पुणे ट्रैफिक पुलिस ने बढ़ते यातायात को नियंत्रित करने के लिए इसे शहरभर के अलग-अलग स्टेशनों में विभाजित करने का निर्णय लिया. तब से यहां बसों की संख्या घटकर 600 रह गई, लेकिन यह अब भी शहर का एक प्रमुख परिवहन केंद्र बना हुआ है.

13 साल पहले बस स्टेशन पर हुआ था दर्दनाक हादसा

2012 में स्वारगेट बस स्टेशन एक भयावह घटना का गवाह बना था. 25 जनवरी को सरकारी बस के ड्राइवर संतोष माने ने पार्किंग से बस निकालते हुए नौ लोगों को कुचल दिया था. इस हादसे के बाद MSRTC ने टर्मिनस की सुरक्षा कड़ी करने के लिए एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर बूम बैरियर लगाए और गेट पर अतिरिक्त सुरक्षा गार्डों की तैनाती की. साथ ही, बस ड्राइवरों को सख्त निर्देश दिए गए कि वे बसों को केवल डिपो के अंदर ही पार्क करें और दरवाजे व खिड़कियां बंद रखें.

सुरक्षा के दावों की खुली पोल

हालांकि, हाल ही में पीड़िता के साथ हुई घटना के वक्त ये सुरक्षा उपाय नदारद नजर आए. आरोपी दत्तात्रय गाडे उसे बस स्टेशन के अंदर ले गया. जिस बस के पास वह उसे ले गया, वहां न लाइट थी, न ड्राइवर और न ही कंडक्टर. आरोपी ने पीड़िता को यह कहकर बस में चढ़ने के लिए कहा कि वह मोबाइल की टॉर्च जलाकर देखे कि कोई यात्री बैठा है या नहीं. जैसे ही वह बस में चढ़ी, आरोपी भी पीछे आ गया और दरवाजा बंद कर लिया. इसके बाद उसने हैवानियत को अंजाम दिया.

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