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1984 सिख विरोधी मामले में सज्जन कुमार को हुई उम्रकैद, कोर्ट का फैसला

दिल्ली विधानसभा का सत्र अब 2 दिन और बढ़ा दिया गया है. विधायक ने  सिएजी रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा करने का अनुरोध किया था, इस पर विधानसभा का सत्र 2 दिन बढ़ा दिया गया है. अदालत ने 12 फरवरी को सज्जन कुमार को इस अपराध के लिए दोषी ठहराया था.

Calendar Last Updated : 25 February 2025, 04:34 PM IST
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दिल्ली विधानसभा का सत्र अब 2 दिन और बढ़ा दिया गया है. विधायक ने  सिएजी रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा करने का अनुरोध किया था, इस पर विधानसभा का सत्र 2 दिन बढ़ा दिया गया है. अदालत ने 12 फरवरी को सज्जन कुमार को इस अपराध के लिए दोषी ठहराया था.

दिल्ली की राऊज एवेन्यु कोर्ट ने 1984 सिख विरोधी दंगे के मामले में कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने 21 फरवरी को सजा पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था. पीड़ित पक्ष ने सज्जन कुमार के लिए मौत की सजा की मांगी थी. सज्जन को 12 फरवरी को दोषी पाया गया था और तिहाड़ सेंट्रल जेल के अधिकारियों से उनकी मानसिक और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने मौत का सजा के मामलों में ऐसी रिपोर्ट जारी की जाती हैं. 

सज्जन 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान सरस्बती विहार में मित्रा सिंह और उनके बेटे किशोरदीर सिंह की हत्या के लिए भीड़ को उकसाने का आरोप हैं.सज्जन कुमार उस समय दिल्ली में लोखसभा सीट से कांग्रेस के सांसद थे. वह पहले से ही इस मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं और उम्रकैद की सजा काट रहे हैं.

मौत की सजा सुनाने की मांग

मामले की एक पिड़ीता ने अपनी याचिका में कहा था की उसने छात्रावास में अपने पती और बेटे को खो दिया है. पिड़ीता ने कहा था की  सज्जन कुमार को मृतयुदंड मिलना चाहिए.  शिकायत करने वाले ने मौत की सजा सुनाए जाने की मांग की थी. उनके वकील एच एस फुल्का ने कहा था कि सज्जन कुमार ने नरसंहार और हत्याओं को अंजाम देने के लिए भीड़ को संगठित किया और उसे इस आरोप में कम से कम मृतयुदंड मिलना चाहिए. 

जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या 1 नवंबर 1984 को छात्रावास में की गई थी. एचएस फुल्का का दावा है कि सज्जन कुमार को पहली बाक  दिल्ली उच्च नयायाल्य ने छावनी के राज नगर इलाके में हुए दंगों से संबंधित पांच हत्याओं के मामले में दोषी ठहराया था.  ये पांचो हत्याएं 1984 की हत्याओं का हिस्सा थीं.

केवल 28 मामलों में ठहराया दोषी

हिंसा के बाद सिख विरोधी प्रदर्शनों की जांच करने वाले नानावटी आयोग ने कहा कि इस अवधि के दौरान दिल्ली के 587 एफआईआर हुई थी, जिसमें 2,733 लोग मारे गए . इनमे से 240 मामलो को बंद कर दया गया था और 250 मामलों को बरी कर दिया गया था.  केवल 28 मामलों में ही दोषी ठहराया गया, जिसमें 50 हत्याओं के मामले शामिल थे. सज्जन कुमार को भी इस मामले में दोषी पाया गया और दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें बाकी खिलाड़ियों के समान ही सजा सुनाई.
 

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