menu-icon
The Bharatvarsh News

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने मचाया हड़कंप, फैसले के पीछे की वजह पर बहस तेज

धनखड़ ने सोमवार को  अपनी नियमित जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया. उन्होंने सुबह सदन नेताओं की बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने इस दिन कार्य मंत्रणा समिति के साथ दो दौर की बैठकें कीं. बैठक में शामिल दो सांसदों ने बताया कि धनखड़ सामान्य रूप से व्यवहार कर रहे थे.

Calendar Last Updated : 22 July 2025, 06:55 AM IST
Share:

Jagdeep Dhankhar: उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. इस फैसले ने न केवल उनके कर्मचारियों को, बल्कि संसद के सांसदों को भी हैरान कर दिया. सोमवार को हुई इस घोषणा से पहले उनके व्यवहार में कोई असामान्य संकेत नहीं दिखा था. 

धनखड़ ने सोमवार को  अपनी नियमित जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया. उन्होंने सुबह सदन नेताओं की बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने इस दिन कार्य मंत्रणा समिति के साथ दो दौर की बैठकें कीं. बैठक में शामिल दो सांसदों ने बताया कि धनखड़ सामान्य रूप से व्यवहार कर रहे थे. इसके बाद, उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता भी की. किसी को भी उनके इस्तीफे का अंदाजा नहीं था.

इस्तीफे के दिन सामान्य रहा दिनचर्या

उपराष्ट्रपति कार्यालय की ओर से लगभग दोपहर चार बजे उनके आगे की योजनाओ के बारे में जानकारी दी गई. प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार धनखड़ 23 जुलाई को जयपुर में रियल एस्टेट डेवलपर्स की संस्था क्रेडाई राजस्थान के सदस्यों से मुलाकात करने वाले थे. यह सामान्य प्रेस विज्ञप्ति थी, जिसमें कोई असामान्य बात नहीं थी. लेकिन इसके कुछ ही मिनट बाद शाम 4:07 बजे धनखड़ ने दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा की. यह मुद्दा पहले से ही विवादों में था. कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इस इस्तीफे पर हैरानी जताई. उन्होंने X पर लिखा कि उपराष्ट्रपति का अचानक इस्तीफा चौंकाने वाला और अकल्पनीय है. मैं शाम 5 बजे तक उनके साथ था और 7:30 बजे फोन पर बात हुई थी. निश्चित रूप से उनके स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी, लेकिन इस इस्तीफे के पीछे कुछ और भी है. 

सोशल मीडिया पर शेयर किया इस्तीफा

उपराष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स अकाउंट से सोमवार की रात अचानक इस्तीफा पत्र पोस्ट किया गया. इस पत्र ने सभी को चौंका दिया. हालांकि धनखड़ के इस फैसले को लेकर कोई भी सरकारी बयान नहीं दिए गए हैं. सूत्रों का कहना है कि धनखड़ ने वरिष्ठ नेताओं से चर्चा किए बिना यह कदम नहीं उठाया होगा. मानसून सत्र पहले से ही ऑपरेशन सिंदूर और न्यायमूर्ति वर्मा के महाभियोग जैसे मुद्दों के कारण चर्चा में था. लेकिन धनखड़ का इस्तीफा सत्र के पहले दिन की सबसे बड़ी खबर बन गया. यह घटना राजनीतिक और संसदीय गतिविधियों पर क्या असर डालेगी, यह देखना बाकी है. धनखड़ के इस्तीफे के कारणों पर अटकलें तेज हैं. क्या यह स्वास्थ्य कारणों से लिया गया फैसला है, या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक वजह है? 

सम्बंधित खबर

Recent News