नई दिल्ली: मच्छरों का किसी खास व्यक्ति के आसपास मंडराना अक्सर संयोग लगता है, लेकिन इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प रहस्य छुपा हुआ है. इसके पीछे सटीक और सुनियोजित प्रक्रिया काम करती है. हालिया वैज्ञानिक शोध में यह सामने आया है कि मच्छर अपने शिकार को पहचानने और उस तक पहुंचने के लिए कई संकेतों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी यह क्षमता और भी रहस्यमयी लगने लगती है.
जॉर्जिया टेक और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने इस विषय पर विस्तृत अध्ययन किया. उन्होंने सैकड़ों मच्छरों की गतिविधियों को ट्रैक करते हुए लगभग 2 करोड़ डेटा बिंदुओं का विश्लेषण किया. इस शोध में विशेष रूप से एडीज एजिप्टी मच्छर की मादा प्रजाति पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो कई खतरनाक बीमारियों को फैलाने के लिए जानी जाती है.
शोध में पाया गया कि मच्छर किसी एक संकेत पर निर्भर नहीं होते, बल्कि वे कई संकेतों का अनुसरण करते हैं. इनमें कार्बन डाइऑक्साइड, शरीर की गंध और दृश्य संकेत शामिल हैं. इन्हीं संकेतों के आधार पर वे यह तय करते हैं कि उन्हें किस दिशा में उड़ना है और किस व्यक्ति को निशाना बनाना है.
वैज्ञानिकों ने 3डी इन्फ्रारेड कैमरों की मदद से एक नियंत्रित वातावरण में मच्छरों की उड़ान का विश्लेषण किया. इस दौरान एक व्यक्ति के कपड़ों के रंग में बदलाव किया गया और देखा गया कि इससे मच्छरों के व्यवहार पर क्या असर पड़ता है.
अध्ययन में यह भी सामने आया कि मच्छर समूह बनाकर या एक-दूसरे का पीछा करके नहीं आते. हर मच्छर स्वतंत्र रूप से संकेतों पर प्रतिक्रिया करता है. वैज्ञानिकों ने इसकी तुलना एक भीड़भाड़ वाली जगह से की, जहां लोग एक ही कारण से एक स्थान पर पहुंचते हैं, न कि एक-दूसरे का अनुसरण करते हुए.
शोधकर्ताओं ने एक गणितीय मॉडल भी विकसित किया है, जो यह बताता है कि मादा मच्छर किस तरह इंसानों की ओर बढ़ती हैं. इससे उनके व्यवहार को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिली है.
इस शोध से उम्मीद है कि मच्छरों को नियंत्रित करने के नए और प्रभावी तरीके विकसित किए जा सकेंगे. खासकर उन बीमारियों के संदर्भ में, जो मच्छरों के जरिए फैलती हैं और हर साल लाखों लोगों की जान लेती हैं.