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पंजाब: पंजाब की सरकारी व्यवस्था में बरसों से चली आ रही आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी प्रथा पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आखिरी चोट कर दी है. आज हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जो राज्य के प्रशासनिक और श्रम ढांचे को पूरी तरह बदल कर रख देगा.
कर्मियों के रेगुलर होने का रास्ता साफ
सूबे के 51 अलग-अलग सरकारी महकमों में काम करने वाले 65,048 अस्थाई और आउटसोर्स कर्मियों के रेगुलर होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. सरकार का सीधा लक्ष्य निजी बिचौलियों को बाहर कर कर्मचारियों के साथ सीधे 'सरकार-कर्मचारी' का नाता जोड़ना है.
कानून में बदलाव और पक्के होने की नई शर्तें
पुरानी व्यवस्था को बदलने के लिए सरकार ने साल 2016 के पुराने कर्मचारी कल्याण एक्ट को रद्द कर दिया है. इसकी जगह अब दो नए कानून लाए जा रहे हैं. पहले कानून के तहत ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के उन कर्मचारियों को जो पिछले 5 साल से लगातार आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे हैं. सीधे सरकारी कॉन्ट्रैक्ट पर लिया जाएगा. इसके बाद जब वे सरकारी कॉन्ट्रैक्ट पर 10 साल की सेवा पूरी कर लेंगे तो उन्हें खाली पड़े स्वीकृत पदों पर पक्का कर दिया जाएगा.
बिजली बोर्ड के लाइनमैन
इस नीति में बिजली बोर्ड के लाइनमैन, सीवर साफ करने वाले कर्मचारी और फायर फाइटर्स जैसी जोखिम भरी ड्यूटी करने वाले लोगों को विशेष राहत दी गई है. उनके लिए 5 साल की इस शर्त को घटाकर सिर्फ 3 साल कर दिया गया है. शुरुआत में ही करीब 26,000 कर्मचारियों को इसका सीधा फायदा मिलने जा रहा है.
किस विभाग के कितने कर्मियों को मिलेगा जीवनदान?
इस ऐतिहासिक सुधार के दायरे में आने वाले प्रमुख विभागों और कर्मचारियों का आंकड़ा इस प्रकार है:
पावर सेक्टर और स्थानीय निकाय
सबसे ज्यादा फायदा बिजली क्षेत्र के 15,753 कर्मचारियों (मीटर रीडर, नोडल सेंटर स्टाफ) और लोकल बॉडीज के 8,436 सफाई कर्मचारियों को होगा.
सहकारी और शिक्षा क्षेत्र
चीनी मिलों और स्पिनफेड जैसी सहकारी संस्थाओं के 8,373 कर्मियों के साथ-साथ स्कूल शिक्षा विभाग के 7,704 कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है.
अन्य प्रमुख विभाग
स्वास्थ्य विभाग के 2,688, लोक निर्माण विभाग (PWD) के 1,570, जल आपूर्ति के 1,575, कृषि विभाग के 1,533 और जेलों में तैनात 1,311 कर्मचारियों समेत तकनीकी व मेडिकल शिक्षा के हजारों कर्मियों को इस दायरे में शामिल किया गया है.
खत्म होगा बिचौलियों का कमीशन
अब तक निजी ठेकेदार इन अस्थाई कर्मचारियों के वेतन में से अपना मोटा कमीशन काट लेते थे. नई व्यवस्था से यह शोषण पूरी तरह बंद हो जाएगा और पूरा पैसा सीधे कर्मियों के बैंक खातों में पहुंचेगा. इसके अलावा, अब इन्हें साल में 10 दिनों की आकस्मिक छुट्टियां (कैजुअल लीव) और महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी लीव का कानूनी अधिकार मिलेगा.
हाजिरी बायोमेट्रिक होगी
पारदर्शिता के लिए हाजिरी को बायोमेट्रिक और आई.एच.आर.एम.एस. सिस्टम से जोड़ा जा रहा है. साथ ही, अब कोई भी अधिकारी किसी कर्मचारी को बिना ठोस वजह और बिना सुनवाई का मौका दिए नौकरी से नहीं निकाल सकेगा। कैबिनेट की हरी झंडी के बाद अगले 45 दिनों में इस पूरी व्यवस्था को जमीन पर उतारने का काम शुरू हो जाएगा.
D.A. और पेंशनर्स के लिए विशेष कमेटी
अस्थाई कर्मचारियों के साथ-साथ पंजाब सरकार ने अपने नियमित कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भी बड़ी सौगात दी है. रुके हुए वित्तीय लाभों की समीक्षा के लिए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर की अगुवाई में एक विशेष कैबिनेट सब-कमेटी का पुनर्गठन किया गया है. यह कमेटी साल 2016 से 2021 के बीच के संशोधित वेतनमान और पेंशन के बकाए के भुगतान का रास्ता निकालेगी. इसके साथ ही जुलाई 2021 से मार्च 2024 तक के पेंडिंग महंगाई भत्ते (D.A.) और महंगाई राहत (D.R.) के बकाया पैसों का भी वित्तीय अध्ययन कर इसका निपटारा करेगी.
राज्य में खुलेंगी 7 विशेष अदालतें
प्रशासन को साफ-सुथरा बनाने और रिश्वतखोरी के मामलों पर तुरंत एक्शन के लिए मान कैबिनेट ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत 7 नई स्पेशल कोर्ट्स बनाने का फैसला लिया है. इनमें से 3 अदालतें मोहाली (SAS नगर) में स्थापित होंगी. जबकि जालंधर, लुधियाना, अमृतसर और पटियाला में 1-1 विशेष अदालत खोली जाएगी.
इन पदों में भर्ती
इन कोर्ट्स को सुचारू रूप से चलाने के लिए 7 एडिशनल जिला एवं सेशन जजों के पदों के साथ 63 सपोर्टिंग स्टाफ की नई भर्तियां की जाएंगी ताकि भ्रष्टाचार के मामलों का फैसला हफ्तों के भीतर हो सके. इसके अलावा न्यायिक अधिकारियों के समय पर प्रमोशन के लिए 'पंजाब सुपीरियर जुडिशियल सर्विस रूल्स' में भी जरूरी बदलाव किए गए हैं.