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पंजाब में ऑर्थोपेडिक उपचार पर करोड़ों खर्च, 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' ने बदली हजारों मरीजों की जिंदगी

पंजाब में हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच एक सरकारी योजना हजारों मरीजों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है. सरकार द्वारा हड्डी और जोड़ों के इलाज पर अबतक ₹84 करोड़ से अधिक खर्च किया जा चुका है.

Calendar Last Updated : 03 June 2026, 11:13 AM IST
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चंडीगढ़: पंजाब में हड्डियों, जोड़ों और दुर्घटनाओं से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के आंकड़े बताते हैं कि ऑर्थोपेडिक उपचार अब राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं.

इस स्थिति को रेखांकित करते हुए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों से पता चला है कि योजना के तहत अब तक हड्डियों, जोड़ों और ट्रॉमा से संबंधित उपचारों पर ₹84 करोड़ से अधिक खर्च किया जा चुका है. यह बढ़ती सर्जिकल जरूरतों और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक सेवाओं तक विस्तारित पहुंच को दर्शाता है.

आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत सबसे अधिक घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) किए गए हैं. इसके बाद कूल्हे की सर्जरी और प्लेट, नेल्स तथा अन्य इम्प्लांट्स के जरिए फ्रैक्चर फिक्सेशन के मामलों की संख्या भी उल्लेखनीय रही है. ये प्रक्रियाएं अब जिला और बड़े सरकारी अस्पतालों में कैशलेस उपचार के तहत नियमित रूप से की जा रही हैं.

45 लाख से अधिक लोगों ने कराया पंजीकरण

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब में अब तक 45 लाख से अधिक लोगों का पंजीकरण हो चुका है, जो कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक उपयोग को दर्शाता है. लुधियाना जिले में 4.8 लाख से अधिक और पटियाला में करीब 4.1 लाख लाभार्थी इस योजना के तहत पंजीकृत हैं.

बढ़ती उम्र के साथ बढ़ रही हैं जोड़ों की समस्याएं

ऑर्थोपेडिक मामलों में हो रही बढ़ोतरी राज्य में स्वास्थ्य संबंधी व्यापक बदलावों की ओर भी संकेत करती है. विशेष रूप से बढ़ती उम्र की आबादी में जोड़ों के घिसाव, लगातार दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. सरकारी अस्पतालों में घुटनों और कूल्हों की खराबी, पुराना जोड़ों का दर्द और गतिशीलता संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. ऑर्थोपेडिक उपचारों में आमतौर पर महंगे इम्प्लांट्स, लंबी उपचार प्रक्रिया और पुनर्वास की जरूरत होती है, जो लंबे समय से परिवारों के लिए भारी आर्थिक बोझ का कारण बनती रही हैं.

गुलशन तनेजा की कहानी बनी उदाहरण

राजपुरा के निकट खेड़ा गज्जू निवासी 43 वर्षीय गुलशन तनेजा के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण रही. फैक्ट्री में काम के दौरान हुए एक हादसे के बाद उनके लिए चलना-फिरना मुश्किल हो गया था. अचानक उठने वाला दर्द उन्हें चलते-चलते रोक देता था और कई बार सहारे की जरूरत पड़ती थी. घुटने के आसपास लगातार सूजन बनी रहती थी और जकड़न के कारण सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित हो रही थीं. 

कई बार उन्हें खड़े होने से पहले यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता था कि उनका पैर शरीर का भार सह पाएगा या नहीं. उन्हें 6 मई को राजिंदरा अस्पताल, पटियाला में भर्ती कराया गया और अगले दिन लिगामेंट टियर का उपचार किया गया. डॉक्टरों ने गंभीर जोड़ दर्द, सूजन, अस्थिरता और वजन सहने में कठिनाई जैसे लक्षण दर्ज किए.

कैशलेस इलाज से मिली बड़ी राहत

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत गुलशन तनेजा को ₹86,750 का इलाज पूरी तरह कैशलेस उपलब्ध कराया गया. 12 मई को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वे बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक चिंता के अपने घर लौट सके. गुलशन तनेजा ने कहा, “मैं अब धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा हूं. सेहत कार्ड की वजह से मुझे अपने इलाज के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ा. यह योजना हमारे जैसे परिवारों के जेब से होने वाले खर्च को कम कर रही है और महंगे इलाज को भी सुलभ बना रही है.”

स्वास्थ्य मंत्री ने बताई योजना की अहमियत

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि ऑर्थोपेडिक बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जिससे राज्य में सुलभ और किफायती सर्जिकल देखभाल को और मजबूत करने की आवश्यकता सामने आई है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सरकार हजारों मरीजों को कैशलेस घुटना, कूल्हा और ट्रॉमा उपचार उपलब्ध करा रही है. इससे न केवल आर्थिक बोझ कम हो रहा है, बल्कि मरीजों की गतिशीलता, रिकवरी और जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार आ रहा है.

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि केवल चार महीनों में ऑर्थोपेडिक उपचारों पर ₹84 करोड़ से अधिक का खर्च होना बढ़ते स्वास्थ्य उपयोग का संकेत है. साथ ही यह राज्य में लोगों की गतिशीलता बहाल करने, विकलांगता कम करने और जीवन स्तर बेहतर बनाने की दिशा में हो रहे बड़े बदलाव को भी दर्शाता है.

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