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पंजाब निकाय चुनावों में चला भगवंत मान का जादू, AAP को 670 सीटों पर मिली शानदार जीत

पंजाब निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राजनीतिक माहौल बदल दिया है. कई बड़े शहरों में मिली जीत ने विपक्ष की चिंता बढ़ा दी है और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नए संकेत दे दिए हैं.

Calendar Last Updated : 29 May 2026, 04:20 PM IST
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चंडीगढ़: पंजाब की जनता ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अब राजनीति में केवल वादे नहीं, बल्कि काम मायने रखता है. नगर निगम, नगर काउंसिल और नगर पंचायत चुनावों के नतीजों ने साबित कर दिया है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार की नीतियों पर लोगों ने भरोसे की मजबूत मुहर लगाई है. 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस राजनीतिक सेमीफाइनल में आम आदमी पार्टी ने ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने पंजाब की राजनीति का पूरा समीकरण बदलकर रख दिया है.

अब तक घोषित 1441 वार्डों के नतीजों में आम आदमी पार्टी ने 670 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में खुद को स्थापित किया है. कांग्रेस 275 सीटों तक सिमट गई, जबकि अकाली दल को 203 सीटों पर संतोष करना पड़ा. भाजपा का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और उसके 1142 उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके. इसे केवल चुनावी हार नहीं, बल्कि पंजाब में भाजपा की राजनीतिक स्वीकार्यता पर जनता के बड़े सवाल के रूप में देखा जा रहा है.

कई शहरों में आम आदमी पार्टी का दबदबा

धूरी में 21 में से 20 सीटों पर जीत, सुनाम में 23 में से 19 सीटें, श्री आनंदपुर साहिब में 13 में से 11 सीटें, रमदास में 11 में से 10 सीटें, करतारपुर में 15 में से 9 सीटें और समाणा में 19 में से 12 सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि उसका जनाधार केवल विधानसभा चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी जनता उसके साथ मजबूती से खड़ी है.
गिद्दड़बाहा में कांग्रेस को बड़ा झटका

गिद्दड़बाहा में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग के राजनीतिक गढ़ में पार्टी को बड़ा झटका लगा. यहां जनता ने कांग्रेस के दावों को खारिज करते हुए आम आदमी पार्टी के पक्ष में स्पष्ट संदेश दिया. इन नतीजों से यह संकेत भी मिला है कि पंजाब की राजनीति अब पुराने चेहरों और पारंपरिक दलों की पकड़ से निकलकर विकास और कामकाज की राजनीति की ओर बढ़ रही है.

जनता ने ‘काम की राजनीति’ को दिया समर्थन

इन चुनावों ने यह भी साबित कर दिया कि विपक्ष द्वारा पिछले चार वर्षों से चलाए जा रहे दुष्प्रचार को पंजाब की जनता ने पूरी तरह नकार दिया है. मुफ्त बिजली, स्कूलों और अस्पतालों में सुधार, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई, युवाओं को रोजगार और आम लोगों को राहत देने वाली नीतियों का असर सीधे चुनावी नतीजों में दिखाई दिया. जनता ने वोट के जरिए यह संदेश दिया है कि उसे रोजमर्रा की जिंदगी में बदलाव चाहिए, न कि केवल बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप.

भाजपा के लिए सबसे चिंताजनक नतीजे

भाजपा की स्थिति इन चुनावों में सबसे ज्यादा कमजोर दिखाई दी. राष्ट्रीय स्तर पर खुद को सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बताने वाली पार्टी पंजाब के नगर निकाय चुनावों में तीसरे या चौथे स्थान की लड़ाई में भी प्रभावी नजर नहीं आई. स्थिति यह रही कि भाजपा के 1142 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि पंजाब की जनता ने दिल्ली से संचालित राजनीतिक प्रयोगों और एजेंसियों के सहारे राजनीति करने वालों को स्पष्ट संदेश दिया है.

अनुराग ढांडा का विपक्ष पर तंज

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने भी चुनावी नतीजों पर विपक्ष को घेरा. उन्होंने कहा कि पंजाब के 48 शहरी निकायों के नतीजे सामने आ चुके हैं, जिनमें 34 पर आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की है. वहीं कांग्रेस केवल 3 और अकाली दल 6 निकायों तक सीमित रहे. उन्होंने भाजपा गठजोड़ पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने तथाकथित “ED पार्टी” को पूरी तरह नकार दिया है. ढांडा ने कहा कि जो लोग एजेंसियों के दम पर सरकारें बनाने की राजनीति करते हैं, उन्हें पंजाब की जनता ने लोकतंत्र की असली ताकत दिखा दी है.

2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संकेत

इन चुनावों को केवल नगर निकाय चुनाव नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जनता के मूड का बड़ा संकेत माना जा रहा है. नतीजे बता रहे हैं कि पंजाब में आम आदमी पार्टी का संगठन लगातार मजबूत हुआ है, सरकार के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान की लोकप्रियता बरकरार है. दूसरी ओर कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा अभी तक ऐसा कोई मुद्दा या नेतृत्व प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं, जो जनता को व्यापक रूप से प्रभावित कर सके.

पंजाब की जनता ने इस चुनाव में केवल अपने प्रतिनिधि नहीं चुने, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी दिया है. संदेश साफ है कि काम की राजनीति को समर्थन मिलेगा, जबकि पुराने ढर्रे की राजनीति, परिवारवाद, अवसरवाद और नकारात्मक राजनीति को जनता लगातार नकारती जाएगी. नगर निकाय चुनावों में चली आम आदमी पार्टी की यह लहर आने वाले समय में पंजाब की राजनीति की दिशा तय करने वाला बड़ा संकेत मानी जा रही है.

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