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दिल्ली कस्टम के सुपरिटेंडेंट अशोक कुमार का कमाल, ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज चैंपियनशिप में जीता सिल्वर मेडल

सरकारी नौकरी की बेहद व्यस्त और चुनौतीपूर्ण ड्यूटी के बावजूद अगर लगन और अनुशासन हो, तो किसी भी उम्र में नया मुकाम हासिल किया जा सकता है.

Calendar Last Updated : 21 February 2026, 07:12 PM IST
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नई दिल्ली: सरकारी नौकरी की बेहद व्यस्त और चुनौतीपूर्ण ड्यूटी के बावजूद अगर लगन और अनुशासन हो, तो किसी भी उम्र में नया मुकाम हासिल किया जा सकता है. इसकी एक बेहतरीन मिसाल सुपरिटेंडेंट अशोक कुमार ने पेश की है. वह आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट, नई दिल्ली एयर कस्टम पर तैनात है. उन्होंने ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज बेस्ट फिजिक चैंपियनशिप 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीतकर अपने विभाग का नाम रोशन किया है.

त्यागराज स्टेडियम में हुआ था आयोजन

इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिता का आयोजन 17 से 19 फरवरी, 2026 के बीच दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में किया गया था. अशोक कुमार ने 50 साल से अधिक उम्र (50+ मास्टर्स कैटेगरी) के खिलाड़ियों के वर्ग में हिस्सा लिया. अपनी बेहतरीन फिटनेस के दम पर यह रजत पदक अपने नाम किया. इस नेशनल लेवल इवेंट में देशभर के 26 राज्यों और विभिन्न सरकारी बोर्डों से आए लगभग 170 चुनिंदा एथलीटों ने हिस्सा लिया था. इतने कड़े और बड़े मुकाबले के बीच सिल्वर मेडल जीतना अशोक कुमार की कड़ी मेहनत को दर्शाता है.

ड्यूटी के साथ फिटनेस का शानदार तालमेल

आईजीआई एयरपोर्ट जैसी हाई-सिक्योरिटी जगह पर एयर कस्टम सुपरिटेंडेंट का पद बहुत जिम्मेदारी भरा होता है, जहां काम का दबाव और व्यस्तता हमेशा बनी रहती है. अपनी इस अहम आधिकारिक ड्यूटी को पूरी ईमानदारी से निभाने के साथ-साथ खुद को राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिता के लिए शारीरिक रूप से फिट रखना कोई आसान काम नहीं है. अशोक कुमार की यह उपलब्धि उनके कड़े अनुशासन और फिटनेस के प्रति उनके गहरे समर्पण का सबूत है.

इंडियन कस्टम्स के लिए गर्व का पल

अशोक कुमार की इस सफलता ने पूरे इंडियन कस्टम्स विभाग का सिर फक्र से ऊंचा कर दिया है. उनकी यह शानदार जीत बाकी सिविल सेवकों और सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि जनसेवा और अपनी आधिकारिक ड्यूटी के साथ-साथ अपनी सेहत, फिटनेस और एक्सीलेंस को भी बेहतरीन तरीके से मैनेज किया जा सकता है. यह कई लोगों का प्रेरणा देगा. भविष्य में ऐसे उदाहरण और सामने आ सकते हैं. विभागीय स्तर पर खेल संस्कृति मजबूत होगी. इससे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा को बढ़ावा मिलेगा. अशोक कुमार की उपलब्धि नई राह दिखाती है.

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