कर्ज के बोझ में डूबा पूरा परिवार! बेंगलुरु में मां-बेटी की मौत, बेटा-नाती जिंदगी-मौत के बीच

बेंगलुरु के एक ही परिवार के चार सदस्यों कर्ज के दबाव के कारण कथित तौर पर आत्महत्या की कोशिश की. ये द्वारा न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कर्ज का बोझ किस हद तक मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है.

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Courtesy: Pinterest

बेंगलुरु: बेंगलुरु के बाहरी इलाके से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जिसने आर्थिक दबाव और पारिवारिक संकट के गंभीर पहलुओं को उजागर कर दिया है. एक ही परिवार के चार सदस्यों कर्ज के दबाव के कारण कथित तौर पर आत्महत्या की कोशिश की. ये द्वारा न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कर्ज का बोझ किस हद तक मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है.

पुलिस के अनुसार, बेंगलुरु के पास हुई इस घटना में 55 वर्षीय आशा और उनकी 34 वर्षीय बेटी वर्षिता की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मोहन गौड़ा (32) और उनका 11 वर्षीय बेटा मयंक गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में उनका इलाज जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह कदम बढ़ते आर्थिक कर्ज के कारण उठाया गया.

घटना आई सामने 

पुलिस ने जांच के दौरान बताया कि, परिवार ने इस कदम से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने अपनी आर्थिक परेशानियों का जिक्र किया. यह वीडियो रिश्तेदारों को भेजा गया था. वीडियो मिलने के बाद परिजन तुरंत घर पहुंचे और अंदर का दृश्य देखकर पुलिस को सूचित किया. 

आत्महत्या करने का किया प्रयास

शुरुआती जांच में पता चला है कि मोहन गौड़ा ने कथित तौर पर पहले अपनी मां, बहन और बेटे पर हमला किया और बाद में खुद को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. पुलिस ने मौके से जरूरी सबूत जुटाए हैं और मामले की जांच जारी है.

कर्ज और कारोबार की भूमिका

आगे बताया गया कि मोहन चिट फंड से जुड़े लेन-देन में सक्रिय था, जिसमें लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक का कारोबार शामिल था. वह मौसमी योजनाएं भी चलाता था, जैसे त्योहारों के दौरान विशेष निवेश योजनाएं. हालांकि, बढ़ते खर्च और असंतुलित वित्तीय प्रबंधन के कारण  कर्ज का दबाव लगातार बढ़ता गया.

पुलिस द्वारा जारी है जांच 

घटना के बाद अब मामले की जांच की जा रही है. पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. ताकी मामले की सच्चाई निकलकर सामने आ सके. अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि परिवार की आर्थिक स्थिति और व्यक्तिगत परिस्थितियों को विस्तार से समझने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा.

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