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कर्नाटक में ट्रेकिंग के दौरान लापता हुई नाबालिग, चार दिन बाद हुई मौत

कर्नाटक की खूबसूरत पहाड़ियों में एक फैमिली टूर अचानक दर्दनाक हादसे में बदल गई. ट्रिप के दौरान एक  14 साल की श्री नंदा रहस्यमय तरीके से लापता हो गई और चार दिन बाद उसकी मौत की खबर ने परिवार वालों को हैरान कर दिया.

Calendar Last Updated : 11 April 2026, 02:50 PM IST
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नई दिल्ली: कर्नाटक की खूबसूरत पहाड़ियों में एक फैमिली टूर अचानक दर्दनाक हादसे में बदल गई. ट्रिप के दौरान एक  14 साल की श्री नंदा रहस्यमय तरीके से लापता हो गई और चार दिन बाद उसकी मौत की खबर ने परिवार वालों को हैरान कर दिया. यह घटना न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके के लिए गहरे सदमे का कारण बन गई है.

कर्नाटक में घूमने गई करीब 40 रिश्तेदारों के साथ घूमने निकली थी. जिसमें केरल के पलक्कड़ की रहने वाली कक्षा 10 की छात्रा श्री नंदा अचानक ही गायब हो गई. परिवार ने पहले हम्पी का दौरा किया और फिर 7 अप्रैल को चिक्कामगलुरु पहुंचा. इसके बाद वे चंद्रद्रोण पर्वतमाला में ट्रेकिंग के लिए गए, जहां यह घटना घटी.

लापता होने की घटना

ट्रेकिंग के दिन तक सब कुछ नॉर्मल ही था, श्री नंदा को परिवार के साथ एक वीडियो में भी देखा गया था. लेकिन शाम करीब 6 बजे वह अचानक गायब हो गई. परिवार के अनुसार उसे आखिरी बार मानिक्यधारा इलाके के पास देखा गया था.

शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन 

शुरुआत में परिवार ने खुद ही खोजबीन की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई. इसके बाद बचाव दल ने पहाड़ियों की गहरी घाटियों और खतरनाक ढलानों में सर्च ऑपरेशन शुरू किया. रस्सियों, ड्रोन और थर्मल कैमरों की मदद से लगातार चार दिन तक खोज जारी रही. आखिरकार, उसका शव मानिक्यधारा व्यूप्वाइंट से करीब 1500 फीट नीचे एक खाई में मिला.

परिवार ने इस घटना को संदिग्ध मानते हुए अपहरण की आशंका जताई है. उनका कहना है कि यह केवल दुर्घटना नहीं हो सकती और मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए.

माता-पिता का फोन किया जब्त

राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि मामले में कई संभावनाएं सामने आ रही हैं अपहरण, दुर्घटना या किसी के साथ जाना. सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी. पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है और इसी सिलसिले में माता-पिता के मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं.

हालिया समान मामला

कुछ दिन पहले ही जी. एस. शरण्या नाम की एक महिला ट्रेकिंग के दौरान कर्नाटक के जंगलों में रास्ता भटक गई थीं, जिन्हें चार दिन बाद सुरक्षित बचा लिया गया था. यह घटना पहाड़ी इलाकों में ट्रेकिंग के दौरान सतर्कता और सुरक्षा उपायों की अहमियत को एक बार फिर उजागर करती है.

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