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राजस्थान से दिल दहला देने वाली तस्वीर! रेगिस्तान में पड़ी मिलीं सैकड़ों गायों की लाशें

राजस्थान के जैसलमेर में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. नगर परिषद के कचरा डंपिंग यार्ड में 500 से ज्यादा गायों के सड़े-गले शव मिलने से सनसनी फैल गई. इस घटना ने गौ संरक्षण के दावों और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Calendar Last Updated : 25 May 2026, 12:51 PM IST
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जैसलमेर: राजस्थान के जैसलमेर जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने गौ संरक्षण और सरकारी व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है. नगर परिषद क्षेत्र के डंपिंग यार्ड में 500 से अधिक मृत गायों के सड़े हुए शव मिलने के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे.

जानकारी के मुताबिक, जैसलमेर जिला मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूर रामगढ़ मार्ग स्थित नगर परिषद के डंपिंग यार्ड में बड़ी संख्या में मृत गायों के शव खुले में पड़े मिले. स्थानीय लोगों और गो सेवकों का आरोप है कि लंबे समय से मृत पशुओं के उचित निस्तारण में लापरवाही बरती जा रही थी, जिसके कारण यह भयावह स्थिति पैदा हुई.

रामगढ़ रोड स्थित डंपिंग यार्ड में मिला भयावह दृश्य

रविवार को वायरल हुए वीडियो में डंपिंग यार्ड के भीतर बड़ी संख्या में गायों के शव दिखाई दिए. स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से यहां मृत पशुओं को बिना उचित व्यवस्था के फेंका जा रहा था. घटना के बाद क्षेत्र में नाराजगी बढ़ गई और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग उठने लगी.

ठेकेदार की लापरवाही पर उठे सवाल

बताया जा रहा है कि नगर परिषद की ओर से मृत पशुओं के निस्तारण का जिम्मा अधिकृत हड्डी ठेकेदार को दिया गया था. आरोप है कि समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण शव लगातार जमा होते गए. वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने संबंधित ठेकेदार और प्रशासन दोनों की भूमिका पर सवाल उठाए.

कलेक्टर ने मांगी रिपोर्ट, ठेकेदार को नोटिस

मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने अधिकारियों से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है. वहीं नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह सोढा ने संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है. प्रशासन का कहना है कि डंपिंग यार्ड से मृत पशुओं को हटाकर उनका निस्तारण कर दिया गया है.

गौ संरक्षण के दावों पर छिड़ी बहस

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने गौ संरक्षण को लेकर किए जाने वाले दावों पर सवाल खड़े किए हैं. लोगों का कहना है कि केवल घोषणाओं और नारों से गौ सेवा संभव नहीं है, बल्कि गौशालाओं में बेहतर सुविधाएं, पर्याप्त चारा, पानी और समय पर उपचार जैसी व्यवस्थाएं जरूरी हैं.

गो सेवकों ने बताई दर्दनाक स्थिति

कुछ स्थानीय गो सेवकों ने दावा किया कि शनिवार को जब वे क्षेत्र में पहुंचे तो वहां बड़ी संख्या में गायों के शव बिखरे पड़े थे. उनका कहना है कि हालात इतने भयावह थे कि वहां कुछ देर खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया.

गौ माता के सम्मान पर उठे सवाल

गो प्रेमी हुक्मदान ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा, जिस समाज में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है, वहां इस तरह की तस्वीरें सामने आना चिंता और आत्ममंथन का विषय है. उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने की मांग की.

जांच शुरू, लेकिन सवाल बरकरार

फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है. हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर गौ संरक्षण की जमीनी हकीकत और व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
 

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