Courtesy: Nitin Nabin
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय संगठन में बड़े पैमाने पर फेरबदल की आहट तेज हो गई है। जनवरी में पदभार संभालने के बाद से ही नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अपनी नई टीम के गठन का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था। अब खबर आ रही है कि नितिन नवीन ने अपनी केंद्रीय टीम के नामों को अंतिम रूप दे दिया है और किसी भी समय पार्टी के नए पदाधिकारियों की आधिकारिक सूची जारी की जा सकती है। चुनावी राज्यों और आगामी रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही इस नई टीम में अनुभव और युवा ऊर्जा के साथ-साथ क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने का पूरा प्रयास किया गया है। नितिन नवीन की इस नई संगठनात्मक कवायद में पार्टी की मुख्य कार्यकारी संस्था 'राष्ट्रीय कार्यकारिणी' का भी नए सिरे से गठन किया जाएगा
केंद्रीय चुनाव समिति का भी होगा पुनर्गठन
पार्टी की सबसे ताकतवर और सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था 'संसदीय बोर्ड' का पुनर्गठन किया जाना है। इसमें अध्यक्ष सहित अधिकतम 11 सदस्य होते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से इसमें 12 सदस्य काम कर रहे थे।
उम्मीदवारों के चयन के लिए ज़िम्मेदार 'केंद्रीय चुनाव समिति' की संरचना में भी फेरबदल होगा। इसमें संसदीय बोर्ड के सदस्यों के अलावा कुछ वरिष्ठ नेताओं को अलग से जगह दी जाती है, जिनमें फिलहाल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और महिला मोर्चा की अध्यक्ष वी. श्रीनिवासन शामिल हैं
33 प्रतिशत महिला आरक्षण
बीजेपी संविधान के संशोधित नियमों के मुताबिक पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों में सामाजिक और लैंगिक प्रतिनिधित्व का विशेष ध्यान रखा जाना अनिवार्य है। प्रस्तावित 38 सदस्यीय पदाधिकारियों की टीम में कम से कम 13 पदों यानी 33 प्रतिशत सीटों पर महिलाओं की नियुक्ति होना तय है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से भी कम से कम तीन-तीन पदाधिकारियों को शामिल करने की व्यवस्था की गई है। माना जा रहा है कि नितिन नवीन की टीम में अधिकतम 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, एक संगठन महामंत्री सहित नौ राष्ट्रीय महामंत्री, 15 मंत्री और एक राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के नाम शामिल हो सकते हैं।
120 सदस्यों को जगह मिलने की संभावना
नितिन नवीन की इस नई संगठनात्मक कवायद में पार्टी की मुख्य कार्यकारी संस्था 'राष्ट्रीय कार्यकारिणी' का भी नए सिरे से गठन किया जाएगा। इसमें अध्यक्ष के अतिरिक्त कुल 120 सदस्य हो सकते हैं, जिसमें कम से कम 40 महिलाओं और 12 एससी-एसटी सदस्यों की मौजूदगी अनिवार्य रखी गई है। राज्यों के प्रतिनिधियों, पूर्व अध्यक्षों, संसदीय दल के सदस्यों और विभिन्न मोर्चों के प्रमुखों को मिलाकर 'राष्ट्रीय परिषद' का भी ढांचा तैयार होगा। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष को 20 विशेष सदस्यों को मनोनीत करने का अधिकार होगा, ताकि आने वाले चुनावों में पार्टी हर मोर्चे पर पूरी मजबूती के साथ उतर सके।