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बसंत पंचमी 2026: इस दिन होगी सरस्वती पूजा, नोट करें पूजा का शुभ मुहूर्त, सामग्री और पूरी विधि

हिंदू धर्म में मां सरस्वती देवी को ज्ञान और संगीत की देवी मानी जाती है. उन्हें अज्ञानता दूर करने वाली देवी माना जाता है. कहते हैं उनकी उपासना से माता की कृपा बनी रहती है इस कारण भारत में बसंत पंचमी के दिन माता की पूजा की जाती है. तो आईए जानते हैं बसंत पंचमी के पूजा की पूरी विधि-

Calendar Last Updated : 23 January 2026, 08:11 AM IST
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नई दिल्ली: हिंदू धर्म में मां सरस्वती देवी को ज्ञान और संगीत की देवी मानी जाती है. ऐसा माना जाता है कि अपने जीवन में संगीत ज्ञान और कल के लिए मां सरस्वती की उपासना करनी चाहिए ताकि उनकी कृपा बनी रहे. माता की कृपा बनाए रखने के लिए भारत में सरस्वती पूजा या बसंत पंचमी की पूजा की जाती है. 

बसंत पंचमी को वसंत पंचमी या सरस्वती पूजा भी कहा जाता है. यह एक सुंदर और शुभ हिंदू त्योहार है, जो वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है. इस दिन ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी माँ सरस्वती की पूजा की जाती है. यह त्योहार खास तौर पर विद्यार्थियों, शिक्षकों और कलाकारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.

बसंत पंचमी का अर्थ

'बसंत' का मतलब है वसंत ऋतु और 'पंचमी' का अर्थ है माघ महीने की पांचवीं तिथि. यह त्योहार हर साल जनवरी या फरवरी महीने में आता है. इस दिन चारों ओर पीले रंग की रौनक देखने को मिलती है, जो खुशी, ऊर्जा और नए आरंभ का प्रतीक है. विद्यार्थियों के लिए इस पर्व का खास महत्व होता है. 

बसंत पंचमी 2026 की तिथि और शुभ समय

द्रिक पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी 2026 शुक्रवार, 23 जनवरी को मनाया जाएगा. पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:46 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा. ये मुहूर्त करीब 5 घंटे 45 मिनट तक रहेगा. पंचमी तिथि की शुरुआत 23 जनवरी 2026, को प्रातः 02:28 बजे होगा और इसका अंत 24 जनवरी 2026, प्रातः 01:46 बजे होगा. 

बसंत पंचमी का महत्व

बसंत पंचमी मां सरस्वती को समर्पित दिन है. ऐसा माना जाता है कि मां सरस्वती ज्ञान, समझ और बुद्धि प्रदान करती हैं. उनकी पूजा से अज्ञानता दूर होता है और पढ़ाई, कला व रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलती है.

यह दिन नई पढ़ाई शुरू करने, किताबें खोलने और ज्ञान के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए बहुत शुभ माना जाता है. छोटे बच्चों के लिए इस दिन विद्या आरंभ या अक्षर अभ्यास कराया जाता है, जिसमें उन्हें पहली बार लिखना सिखाया जाता है.

स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों में इस दिन विशेष पूजा का आयोजन होता है. विद्यार्थी मां सरस्वती से सफलता और एकाग्रता की प्रार्थना करते हैं.

बसंत पंचमी पूजा विधि और सामग्री

बसंत पंचमी के दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ-सुथरे पीले या सफेद कपड़े पहनते हैं. पूजा स्थान पर मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित की जाती है. उसके बाद उन्हें पीले फूल अक्षत (साबुत चावल), चंदन, पीली रोली, अगरबत्ती और दीपक, पीली मिठाई (जैसे बूंदी या लड्डू) अर्पित करते हैं.  पूजा के दौरान दीपक जलाया जाता है, सरस्वती वंदना गाई जाती है और आरती की जाती है.

विद्यार्थी अपनी किताबें, कापियां, पेन आदि मां सरस्वती के सामने रखकर आशीर्वाद लेते हैं. संगीत, नृत्य और कला से जुड़े लोग अपने वाद्ययंत्रों की भी पूजा करते हैं.

माँ सरस्वती के पूजन मंत्र

पूजा के समय कुछ सरल और पवित्र मंत्रों का जाप भी किया जा सकता है. जोकि इस प्रकार हैं-

ॐ सरस्वत्यै विद्महे, ब्रह्मपुत्रयै धीमहि, तन्नो देवी प्रचोदयात्.

या देवी सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः.

या देवी सर्व भूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः.

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