नई दिल्ली: होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जिसकी शुरुआत फाल्गुन माह की पूर्णिमा की रात को होलिका जलाने से होती है और अगले दिन रंगों के जीवंत उत्सव के साथ समाप्त होती है. इस साल होली 4 मार्च को मनाई जाएगी, जो परिवारों को रंगों, भक्ति और आनंद के संगम में एक साथ लाएगी.
परंपरा के अनुसार, होली की शुरुआत दोस्तों पर रंग लगाने से नहीं, बल्कि अपने इष्ट यानी की भगवान को रंग चढ़ाने से होनी चाहिए. सुबह की पूजा से घर में सकारात्मकता, सद्भाव और समृद्धि आने वाले साल के लिए सुनिश्चित होती है. तो ऐसे में यहां पर हम आपको बताने वाले हैं कि कई घरों में होली की शुरुआत पारंपरिक रूप से कैसे होती है.
होली वाले दिन सुबह नहाने के बाद, अपने इष्ट या भगवान को सबसे पहले अपने अबीर या गुलाल चढ़ाए. इसके बाद ही अपने परिवार और मित्रों के साथ होली का त्योहार मनाएं.
भगवान को रंग अर्पित करना कृतज्ञता का प्रतीक है. अपनी इस छोटी सी हरकत से आप भगवान का आभार जताते हैं. साथ ही इस दौरान लोग अपने परिवार की शांति, सुरक्षा और सुख के लिए आशीर्वाद मांगता है. होली की शुरुआत इस तरह से करना शुभ माना जाता है.
अधिकांश हिंदू अनुष्ठानों में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है. होली की सुबह उन्हें सिंदूर या नारंगी गुलाल चढ़ाना शुभ माना जाता है. भक्त मोदक भी चढ़ाते हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि वे कार्य में सफलता दिलाते हैं और जीवन की बाधाओं को दूर करते हैं.
होली का गहरा संबंध भगवान कृष्ण और राधा रानी से है. पौराणिक कथाओं के अनुसार माना जाता है कि उन्होंने पहली बार एक साथ होली खेली थी. इस दिन उनकी मूर्तियों पर अबीर और गुलाल चढ़ाया जाता है. कई घरों में लोग अपने घर के मंदिर में रंग, गुलाल चढ़ाते हैं. पुरानी लोककथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि राधा रानी को चमकीले रंग चढ़ाए जाते हैं, जबकि कृष्ण को हल्के या गहरे रंग चढ़ाए जाते हैं.
भगवान विष्णु और उनके अवतारों पर पीले गुलाल चढ़ाएं. पीला रंग समृद्धि, ज्ञान और शुभता का प्रतीक है. इस दिन पीले फल और मिठाई का अर्पण करना भी लाभकारी माना जाता है.
होली के अवसर पर भक्त शिव को लाल या नीले रंग का गुलाल चढ़ाते हैं. बेलपत्र, पवित्र राख और फूल भी अर्पित किए जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस प्रकार की भेंटें बाधाओं को दूर करने और आंतरिक शक्ति प्रदान करने में सहायक होती हैं.