नई दिल्ली: आज प्रयागराज में चल रहे माघ मेले का तीसरा सबसे बड़ा नहान है. आज यानी की 18 जनवरी को माघी अमावस्या या मौनी अमावस्या मनाई जा रही है. हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का बहुत बड़ा महत्व है. यह दिन खास तौर पर पूर्वजों और पितरों को याद करने और उनका सम्मान करने की मान्यता है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, मौनी अमावस्या माघ महीने की अमावस्या तिथि को आती है. वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या रविवार, 18 जनवरी को मनाई जा रही है. आज के दिन श्रद्धालु गंगा में स्नान कर तर्पण, दान-पुण्य आदि करते हैं. कुछ तो आज के दिन अनाज का भी दान करते हैं. मौनी अमावस्या का अलग-अलग शुभ मुहूर्त माना गया है.
मौनी अमावस्या को आत्म शुद्धि और मन की शांति का दिन माना जाता है. इस दिन लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके लिए पूजा-अर्चना करते हैं. माना जाता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं.
इसे माघ अमावस्या भी कहा जाता है, क्योंकि यह माघ महीने में पड़ती है. इस दिन मौन रहना, यानी कम बोलना या बिल्कुल न बोलना, बहुत शुभ माना जाता है. कुछ मान्यताओं के अनुसार आज के दिन लोग मौन होकर स्नान करते हैं. श्रद्धालु स्नान के बाद मौनी अमावस्या वाले दिन कुछ बोलते हैं. इससे मन शांत रहता है और आत्मचिंतन में मदद मिलती है.
मौनी अमावस्या के दिन गंगा नदी या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना बहुत फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि इससे पुराने पापों से मुक्ति मिलती है और मन, शरीर व आत्मा शुद्ध होते हैं. इसी कारण इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों पर स्नान करने पहुंचते हैं.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मौनी अमावस्या का दिन बहुत खास माना जाता है. इस दिन कई ग्रह एक साथ एक ही राशि में स्थित रहते हैं, जिससे आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है. इसलिए इस दिन पूजा, ध्यान और जप करना अधिक फल देने वाला माना जाता है.
प्रयागराज में लगने वाले माघ मेले में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है. इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु संगम में स्नान करने आते हैं. यह माघ मेले का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण दिन माना जाता है.