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नई दिल्ली: सावन का पहला मंगलवार आज है और इसी के साथ पहला मंगला गौरी व्रत भी रखा जा रहा है. यह व्रत माता पार्वती को समर्पित है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं. इस दिन भगवान शिव और माता गौरी की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व माना गया है.
आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:20 बजे से 5:02 बजे तक रहेगा. वहीं, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक है. सामान्य पूजा के लिए सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे तक का समय बताया गया है. भक्त अपनी सुविधा के अनुसार इस अवधि में माता गौरी की पूजा कर सकते हैं.
मंगला गौरी व्रत के दिन भद्रा और पंचक का भी संयोग बन रहा है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, भद्रा रात 10:03 बजे से अगले दिन सुबह 5:45 बजे तक रहेगी. वहीं चोर पंचक सुबह 5:44 बजे से रात 9:54 बजे तक रहने वाला है.
व्रत रखने वाली महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए. इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. कलश स्थापित करके उसमें आम के पत्ते और नारियल रखें.
इसके बाद माता गौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. उन्हें हल्दी, कुमकुम, चूड़ी, बिंदी, वस्त्र और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित करें. घी का दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद मंगला गौरी व्रत कथा सुनें और माता की आरती करें. पूजा के अंत में देवी को 16 प्रकार की सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा है.
सावन के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखने की परंपरा है. मान्यता है कि इस व्रत से माता पार्वती और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है. सुहागिन महिलाएं विशेष रूप से पति की लंबी आयु, वैवाहिक सुख और परिवार की समृद्धि के लिए यह व्रत करती हैं.