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Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, जाने किस समय बांधे राखी

28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने वाला है, ऐसे में लोगों के मन में राखी बांधने के सही समय को लेकर कई सवाल हैं.

Calendar Last Updated : 17 August 2026, 06:52 PM IST
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नई दिल्ली: रक्षाबंधन 2026 इस बार बेहद खास संयोग के साथ मनाया जाएगा. भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का यह पर्व 28 अगस्त को पड़ेगा और इसी दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है. ऐसे में लोगों के मन में ग्रहण, सूतक काल और राखी बांधने के सही समय को लेकर कई सवाल हैं. आइए जानते हैं इस दिन से जुड़ी जरूरी जानकारी.

28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन

पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा की तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा.

इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना करेंगी. वहीं भाई बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेते हैं.

रक्षाबंधन के दिन लगेगा चंद्र ग्रहण

28 अगस्त को ही साल का अंतिम चंद्र ग्रहण भी लगेगा. पंचांग जानकारी के मुताबिक, ग्रहण सुबह 6:53 बजे शुरू होकर दोपहर 12:31 बजे तक रह सकता है. हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भारत में इसका सूतक काल लागू नहीं होगा और ग्रहण से जुड़े प्रतिबंध भी मान्य नहीं माने जाएंगे.

किस समय बांधें राखी?

28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक का समय बताया गया है. इसके अलावा लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 7:33 से 9:10 बजे तक और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 9:10 से 10:46 बजे तक रहेगा.

भद्रा का साया कब रहेगा?

रक्षाबंधन से एक दिन पहले 27 अगस्त को भद्रा का प्रभाव सुबह 9:08 बजे से रात 9:32 बजे तक बताया गया है।.इसके समाप्त होने के बाद 28 अगस्त को राखी का पर्व मनाने में भद्रा की बाधा नहीं रहेगी.

कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?

यह आंशिक चंद्र ग्रहण अफ्रीका, यूरोप, उत्तर और दक्षिण अमेरिका के अलावा पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों में दिखाई देने की संभावना है. भारत में इसके दिखाई न देने के कारण यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा.

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है. अलग-अलग पंचांगों में समय में मामूली अंतर हो सकता है. किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान की सलाह लें.

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