menu-icon
The Bharatvarsh News

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, फिर भी नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के रेट, जानें कब तक मिलेगी राहत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है, लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम अभी भी स्थिर हैं. पोर्ट ब्लेयर में सबसे सस्ता ईंधन मिल रहा है, जबकि कीमतों के पीछे कई अहम कारण जुड़े हैं.

Calendar Last Updated : 27 August 2026, 11:40 AM IST
Share:

नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है, लेकिन इसका असर फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दिखाई नहीं दे रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया है. इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने 27 अगस्त के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया है. वहीं, सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल पोर्ट ब्लेयर में और सस्ता घरेलू एलपीजी मुंबई में मिल रहा है.

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह करीब 6 बजे वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड 0.59 डॉलर की गिरावट के साथ 81.64 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. वहीं अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.63 डॉलर टूटकर 87.21 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया. सवाल यह है कि सस्ते कच्चे तेल का असर खुदरा कीमतों तक कब पहुंचेगा.

पोर्ट ब्लेयर में सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल

देश में पेट्रोल और डीजल की सबसे कम कीमत पोर्ट ब्लेयर में दर्ज की गई है. यहां पेट्रोल 88.66 रुपये प्रति लीटर और डीजल 84.56 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है. मुंबई में घरेलू एलपीजी 941.50 रुपये में मिल रहा है.

जानिए प्रमुख शहरों के ताजा भाव

जयपुर में पेट्रोल 112.66 रुपये और डीजल 97.78 रुपये प्रति लीटर है. पटना में पेट्रोल 112.70 रुपये और डीजल 99.87 रुपये लीटर बिक रहा है. लखनऊ में पेट्रोल 102.05 रुपये और डीजल 99.28 रुपये है. भोपाल में पेट्रोल की कीमत 114.65 रुपये, जबकि डीजल 99.74 रुपये प्रति लीटर है. दिल्ली में E0 पेट्रोल 167.35 रुपये प्रति लीटर बताया गया है. E5 पेट्रोल की कीमत 109.24 रुपये और E20 पेट्रोल का दाम 102.12 रुपये प्रति लीटर है.

कच्चा तेल सस्ता होने पर भी क्यों नहीं घटते रेट?

कच्चे तेल में बदलाव का असर हर देश में अलग होता है. यह इस पर निर्भर करता है कि ईंधन के दाम बाजार तय करता है या सरकार. विशेषज्ञ इसे पास-थ्रू इफेक्ट कहते हैं, यानी कच्चे तेल की कीमत में हुए बदलाव का कितना हिस्सा खुदरा कीमतों तक पहुंचता है. जिन देशों में बाजार कीमतें तय करता है, वहां असर पहले सप्ताह से दिखने लगता है. दूसरे सप्ताह में इसका प्रभाव ज्यादा हो सकता है और तीसरे या चौथे सप्ताह तक नई कीमतों का पूरा असर सामने आता है. हालांकि, टैक्स और एक्साइज ड्यूटी की दरें भी तय करती हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट का फायदा उपभोक्ताओं तक कितना पहुंचेगा.

सम्बंधित खबर

Recent News