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नई दिल्ली: सावन के पवित्र महीने में लोग प्याज के सेवन से परहेज कर रहे हैं और आगामी बड़े त्योहारों में अभी वक्त बाकी है, जिसकी वजह से चीनी की खुदरा मांग भी बहुत ज्यादा नहीं है। इसके बावजूद रसोई के ये दो सबसे जरूरी सामान आम आदमी के बजट की कमर तोड़ने की होड़ में लगे हुए हैं। महज एक महीने पहले बाजार में जो प्याज 25 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वह अब कई प्रमुख शहरों में 65 रुपये के पार पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर चीनी की कीमतें भी तेजी से उछलकर 70 रुपये प्रति किलो से ऊपर चली गई हैं। हालांकि, स्थिति को बिगड़ते देख मोदी सरकार ने दोनों महत्वपूर्ण चीजों के दामों पर नियंत्रण पाने के लिए कमर कस ली है।
नई फसल में देरी से बढ़ा प्याज का भाव
देशभर में प्याज के दामों में दर्ज की गई इस तेजी की वजह कोई अचानक बढ़ी मांग नहीं है, बल्कि पुराने रबी स्टॉक के खत्म होने और नई फसल के बाजार में आने के बीच का मौसमी अंतर है।
अगस्त में देश में प्याज की औसतन खुदरा कीमत लगभग 42 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। यह कीमत बीते साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 45 प्रतिशत और पिछले महीने की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है।
प्याज और चीनी के दामों में लगी होड़
राजधानी दिल्ली में प्याज की खुदरा कीमत 65 रुपये प्रति किलो तक दर्ज की गई है, जो बीते साल करीब 35 रुपये थी। इसी तरह चेन्नई में भी भाव 58 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है। भारत में प्याज की कीमतें बड़े पैमाने पर इसकी मौसमी आवक पर टिकी होती हैं। मार्च-अप्रैल में तैयार होने वाली रबी फसल ही देश की मुख्य भंडारण वाली फसल होती है, जो अक्टूबर तक आपूर्ति बनाए रखती है।
मगर इस बार महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से देर से तैयार हुई फसल के साथ-साथ स्टोर किए गए प्याज की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा। अब जब पुराना स्टॉक तेजी से कम हो रहा है, तो इसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है। महाराष्ट्र में मानसून की देरी से खरीफ प्याज की बुवाई भी प्रभावित हुई है, जिससे नई फसल की आवक आगे खिसकने की आशंका है।
10 दिनों में चीनी क दामों में 17 तक का तेज उछाल
देश के विभिन्न राज्यों में चीनी की खुदरा कीमतों में भी अगस्त के दूसरे पखवाड़े में अचानक अप्रत्याशित तेजी देखी गई। 12 अगस्त से 22 अगस्त के बीच चीनी का भाव 14 से 17 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गया। इस दौरान पूर्वोत्तर के प्रमुख शहर गुवाहाटी में सबसे ज्यादा उछाल दर्ज किया गया, जहां चीनी 54 रुपये से सीधे 71 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। यानी उपभोक्ताओं को महज दस दिनों में 17 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं। चीनीमंडी के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 12 अगस्त को चीनी 54 रुपये किलो थी, जो 22 अगस्त तक बढ़कर 68 रुपये किलो हो गई। केवल 17 से 20 अगस्त के बीच महज चार दिनों में दिल्ली में चीनी 8 रुपये महंगी हुई। इसी तरह कानपुर में भाव 54 से बढ़कर 69 रुपये, रायपुर व मुंबई में 68 रुपये, और रांची, कोलकाता, हैदराबाद व चेन्नई जैसे महानगरों में चीनी 70 रुपये प्रति किलो के आंकड़े को छू गई है।
आयात के जरिए कीमतें काबू करने की तैयारी
प्याज की बढ़ती कीमतों पर ब्रेक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। इसके तहत 'कांदा एक्सप्रेस' (विशेष मालगाड़ियों) की शुरुआत की जा रही है। नासिक से प्याज को विशेष ट्रेनों के जरिए दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे भारी खपत वाले शहरों तक तेजी से भेजा जाएगा। इसके साथ ही सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज को खुले बाजार में उतार रही है ताकि उन इलाकों में कीमतें नीचे लाई जा सकें जहां भाव राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक हैं। चीनी की महंगाई से राहत दिलाने के लिए सरकार ने जमाखोरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है और चीनी मिलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को हरी झंडी दे दी गई है।