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नई दिल्ली: ईरान के दक्षिणी फारस प्रांत में 212 अरब घन मीटर (लगभग 7.5 ट्रिलियन क्यूबिक फीट) से अधिक क्षमता वाले नए प्राकृतिक गैस भंडार की खोज हुई है। ईरान के तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने देश के राष्ट्रीय टेलीविजन पर इस बड़ी कामयाबी की घोषणा करते हुए बताया कि खोजे गए कुल भंडार में से लगभग 160 अरब घन मीटर (5.7 ट्रिलियन क्यूबिक फीट) गैस की वाणिज्यिक निकासी की जा सकती है। उन्होंने इसे देश की भावी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती की दिशा में बेहद अहम कदम करार दिया।
पाबंदियों और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती बरकरार
विश्लेषकों का मानना है कि केवल इस खोज से अमेरिका के साथ जारी भू-राजनीतिक संघर्ष की दिशा रातों-रात नहीं बदलेगी। अमेरिकी पाबंदियों के कारण ईरान को इस भंडार का पूर्ण व्यावसायिक उपयोग करने के लिए आधुनिक तकनीक और भारी विदेशी निवेश की सख्त जरूरत होगी।
पिछले कुछ समय में हुए सैन्य हमलों के कारण ईरान का एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर काफी क्षतिग्रस्त हुआ है, जिसके चलते घरेलू स्तर पर भी बिजली और गैस की किल्लत देखी जा रही है।
साउथ पार्स क्षेत्र के एक पूरे ब्लॉक के बराबर क्षमता
ईरान के तेल मंत्रालय के अनुसार, यह नई खोज क्षमता के मामले में ईरान के प्रसिद्ध साउथ पार्स गैस क्षेत्र के एक पूरे ब्लॉक के बराबर मानी जा रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह नया भंडार अगले 15 वर्षों तक देश की प्राकृतिक गैस जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है।
इस खोज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 'स्वीट' नेचुरल गैस है, जिसमें जहरीली और संक्षारक हाइड्रोजन सल्फाइड गैस की मात्रा न के बराबर है। हाइड्रोजन सल्फाइड न होने के कारण इस गैस को रिफाइन करने और निकालने में लगने वाली लागत और समय में भारी कमी आएगी। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस विशाल भंडार से जल्द से जल्द उत्पादन शुरू करने के लिए आपातकालीन स्तर पर काम शुरू किया जा रहा है।
ट्रंप के 'D-Day' प्लान को ईरान की खुली चुनौती
इस विशाल खोज के सामने आते ही वाशिंगटन और तेहरान के बीच बयानों की जंग और तेज हो गई है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को आर्थिक रूप से मदद करने वाले देशों के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े अभियान का ऐलान करते हुए इसे 'ECONOMIC D-DAY' करार दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस सख्त रुख पर पलटवार करते हुए ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रजाई ने कड़ी चेतावनी जारी की। रजाई ने कहा कि अगर यह आर्थिक युद्ध जारी रहा, तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य या फारस की खाड़ी से एक बूंद भी तेल निर्यात नहीं होने देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के इस आर्थिक अभियान में साथ देने वाले किसी भी देश को ईरान युद्ध का हिस्सा मानेगा।