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कुछ साइकेट्रिस्ट बताते हैं एंजायटी एक मेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें लोग फ्यूचर की अनिश्चितताओं को लेकर अत्यधिक चिंता और डर महसूस करते हैं. इसमें व्यक्ति को लगातार बेचैनी, घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना और नींद में परेशानी जैसी समस्याएं होती हैं. कई बार यह डर बिना किसी स्पष्ट कारण के भी महसूस होता है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है. यह स्थिति अक्सर तनावपूर्ण परिस्थितियों में बढ़ जाती है. अगर थोड़ा बहुत एंजायटी हो, तो यह नॉर्मल है. ज्यादा होने लगे, तब यह डिसऑर्डर बन जाता है.
डॉक्टर प्रेरणा ने बताया डिप्रेशन एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें व्यक्ति लंबे समय तक उदास और निराश महसूस करता है. उसे किसी भी चीज में इंट्रेस्ट नहीं रहता और किसी भी काम में मन नहीं लगता. इससे आत्मविश्वास कम हो जाता है और कई बार जीवन के प्रति नकारात्मक विचार भी आने लगते हैं. डिप्रेशन केवल मूड की समस्या नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की सोच, व्यवहार और शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है.
दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि एंजायटी में व्यक्ति भविष्य की चिंता से जूझता है, जबकि डिप्रेशन में व्यक्ति वर्तमान की निराशा से परेशान रहता है. एंजायटी में शरीर हाइपर एक्टिव रहता है, जबकि डिप्रेशन में एनर्जी कम हो जाती है. कई मामलों में दोनों एक साथ भी हो सकते हैं, जिसे मिक्स्ड एंजायटी-डिप्रेशन कहा जाता है.
अगर गंभीरता की बात करें, तो दोनों ही कंडीशन खतरनाक हो सकती हैं. हालांकि डिप्रेशन को अक्सर ज्यादा गंभीर माना जाता है, क्योंकि इसमें आत्महत्या जैसे विचार भी आने लगते हैं. एंजायटी लंबे समय तक रहने पर हार्ट डिजीज, नींद की समस्याएं और मानसिक थकान पैदा हो सकती है. इसलिए किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर इलाज लेना जरूरी है.
इन दोनों परेशानियों का इलाज संभव है. थेरेपी, काउंसिलिंग, लाइफस्टाइल बदलाव और जरूरत पड़ने पर दवाइयों से मरीज की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है. समय पर पहचान और इलाज से इन्हें पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है.