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UPI से 2,000 रुपये से ऊपर पेमेंट पर लगेगा चार्ज? सरकार के नए प्रस्ताव ने बढ़ाई चिंता

सरकार ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% तक MDR लागू करने पर विचार कर रही है. हालांकि, यह सिर्फ एक प्रस्ताव है और इसे लागू करने की तारीख पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

Calendar Last Updated : 05 August 2026, 06:54 PM IST
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नई दिल्ली: देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे पॉपुलर माध्यम बन चुकी यूपीआई (UPI) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने एक ऐसा प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत भविष्य में 2,000 से अधिक के व्यावसायिक (मर्चेंट) यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जा सकता है. हालांकि, फिलहाल इस प्रस्ताव को लागू करने की कोई तारीख तय नहीं की गई है. 

क्या है टैक्सेशन एंड अदर लॉज 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किए गए टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल के जरिए इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट्स पर एमडीआर लगाने से जुड़े मौजूदा प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा है. अगर यह बदलाव लागू होता है, तो बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स बड़े व्यावसायिक यूपीआई भुगतान पर 0.25% से 0.4% तक एमडीआर वसूल सकेंगे. 

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क केवल बिजनेस-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर लागू होगा। यानी व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) के बीच होने वाले यूपीआई ट्रांसफर पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे. इससे आम लोगों के रोजमर्रा के लेनदेन, जैसे परिवार या दोस्तों को पैसे भेजना, प्रभावित नहीं होंगे.

क्या-क्या चीजें रहेंगी इस दायरे से बाहर 

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित सीमा 2,000 से अधिक के लेनदेन पर लागू होगी। ऐसे ट्रांजैक्शन कुल यूपीआई लेनदेन का केवल लगभग 5 प्रतिशत हैं, लेकिन उनकी कुल मूल्य हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत है. इसका मतलब है कि दूध, सब्जी, किराना, ऑटो या छोटे-मोटे दैनिक भुगतान जैसे अधिकांश लेनदेन इस दायरे से बाहर रहेंगे.

जुलाई महीने में कितना हुआ लेनदेन 

आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई महीने में यूपीआई के जरिए करीब 23.7 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि लगभग 29.9 लाख करोड़ रुपये रही. अधिकारियों का कहना है कि अगरएमडीआर लागू भी होता है, तब भी करीब 95 प्रतिशत यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। इसके अलावा, सभी व्यापारी यह शुल्क ग्राहकों से वसूलें, यह भी जरूरी नहीं है. 

यूपीआई आज भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र की रीढ़ बन चुका है और हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन इसके जरिए किए जाते हैं. ऐसे में सरकार और नियामक संस्थाएं इस व्यवस्था को लंबे समय तक टिकाऊ और मजबूत बनाए रखने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रही हैं. अब इस प्रस्ताव पर सरकार का अंतिम फैसला आने के बाद ही यह साफ होगा कि बड़े व्यावसायिक यूपीआई भुगतान के नियमों में क्या बदलाव होंगे.

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