menu-icon
The Bharatvarsh News

ईरान युद्ध के बीच शांतिदूत बनने का नाटक कर रहे पाकिस्तान की अमेरिकी रिपोर्ट ने खोल दी पोल, फिर हुई इंटरनेशनल बेइज्जती

ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को अमेरिकी संसद की रिपोर्ट ने बड़ा झटका दिया है. इस रिपोर्ट में पाकिस्तान को लश्कर और जैश जैसे 12 अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों का सुरक्षित पनाहगाह बताया गया है.

Calendar Last Updated : 30 March 2026, 08:44 PM IST
Share:

पाकिस्तान की दोहरी नीति एक बार फिर वैश्विक मंच पर उजागर हो गई है. एक तरफ वह खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक जिम्मेदार मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी संसद की एक ताजा शोध रिपोर्ट ने उसके आतंकी नेटवर्क की खौफनाक सच्चाई दुनिया के सामने रख दी है. 25 मार्च को जारी हुई अमेरिकी कांग्रेस की इस रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद पाकिस्तान की जमीन आज भी आतंकवाद की नर्सरी बनी हुई है.

इस आधिकारिक रिपोर्ट में पाकिस्तान को कई खूंखार आतंकवादी संगठनों का 'पुराना अड्डा' करार दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में कई ऐसे आतंकी गुट फल-फूल रहे हैं जो 1980 के दशक से अपनी जड़ें जमाए हुए हैं. अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि तमाम सैन्य ऑपरेशनों और हवाई हमलों के दावों के बावजूद, पाकिस्तान इन आतंकी नेटवर्कों को पूरी तरह खत्म करने में नाकाम रहा है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित कई आतंकी आज भी वहां खुलेआम सांस ले रहे हैं.

12 संगठन घोषित हुए अंतरराष्ट्रीय आतंकी 

रिपोर्ट की सबसे गंभीर बात यह है कि इसमें पाकिस्तान में सक्रिय संगठनों को उनके भौगोलिक फोकस के आधार पर वैश्विक, भारत केंद्रित और अफगानिस्तान केंद्रित जैसी श्रेणियों में बांटा गया है. इनमें से कम से कम 12 ऐसे संगठन हैं जिन्हें अमेरिकी कानून के तहत विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) घोषित किया जा चुका है. ये संगठन मुख्य रूप से इस्लामी चरमपंथी विचारधारा का प्रसार करते हैं और दक्षिण एशिया की शांति के लिए निरंतर खतरा बने हुए हैं.

लश्कर और जैश का काला साम्राज्य 

रिपोर्ट में विशेष रूप से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का विवरण दिया गया है. 2008 के मुंबई हमलों के गुनहगार लश्कर-ए-तैयबा की जड़ें 1980 के दशक तक जाती हैं. हाफिज सईद के नेतृत्व में यह संगठन आज भी 'जमात-उद-दावा' जैसे नए नामों की आड़ में पाकिस्तान के पंजाब और पीओके से अपनी गतिविधियां चला रहा है. वहीं, मसूद अजहर का जैश-ए-मोहम्मद करीब 500 सक्रिय लड़ाकों के साथ भारत और अफगानिस्तान में अस्थिरता फैलाने में जुटा है.

'द रेजिस्टेंस फ्रंट' और नए उभरते खतरे 

अमेरिकी रिपोर्ट ने 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) का भी उल्लेख किया है, जिसे लश्कर-ए-तैयबा का ही एक मुखौटा माना जाता है. इसी समूह ने पहलगाम में हुए उस कायराना हमले को अंजाम दिया था जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी. अब इसे भी वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है. इसके अलावा हरकत-उल मुजाहिदीन और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों की मौजूदगी यह साबित करती है कि पाकिस्तान की ओर से की गई कार्रवाइयां केवल दिखावा मात्र रही हैं.

सम्बंधित खबर

Recent News