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'अस्तित्व खत्म हो जाएगा' ईरान पर एयरस्ट्राइक के बाद ट्रंप का बड़ा अल्टीमेटम

अमेरिका और ईरान के बीच बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है. अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरे दिन ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए एक पोस्ट किया है.

Calendar Last Updated : 28 June 2026, 12:11 PM IST
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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि अगर हालात दोबारा बिगड़ते हैं और अमेरिका को सैन्य कार्रवाई पूरी करनी पड़ी, तो ईरान के इस्लामी गणराज्य का अस्तित्व खत्म हो सकता है. वहीं, अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरे दिन ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं और तेहरान पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.Maps

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए बताया कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के अलावा तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाया है. उन्होंने दावा किया कि ईरान ने युद्धविराम समझौते का दोबारा उल्लंघन किया है, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई.

ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि 'एक समय ऐसा आ सकता है जब हम और समझदारी से काम न ले पाएं, और हमें उस काम को मिलिट्री के ज़रिए पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था. अगर ऐसा हुआ, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा!'

CENTCOM ने नए सैन्य अभियान की पुष्टि की

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी ईरान में कई ठिकानों पर हमले की पुष्टि की है. सेना के अनुसार यह अभियान राष्ट्रपति के निर्देश पर चलाया गया. अमेरिकी पक्ष का आरोप है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एम/टी किकू पर ड्रोन हमला किया था. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक उस जहाज में करीब 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल मौजूद था. इसी घटना के जवाब में ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया.

किन ठिकानों पर हुआ हमला?

CENTCOM के अनुसार इस सैन्य अभियान में ईरान की निगरानी प्रणाली, संचार नेटवर्क, हवाई सुरक्षा व्यवस्था, ड्रोन स्टोरेज सेंटर और बारूदी सुरंग बिछाने से जुड़े ठिकानों पर हमले किए गए. अमेरिका का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल क्षेत्र में सुरक्षा को चुनौती देने वाली गतिविधियों के लिए किया जा रहा था. इससे पहले भी शुक्रवार को अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर कार्रवाई की थी. अमेरिकी प्रशासन ने उस कार्रवाई को भी होर्मुज जलडमरूमध्य में एक व्यावसायिक जहाज पर हुए कथित ड्रोन हमले का जवाब बताया था.

कार्रवाई से पहले ट्रंप ने दिए थे संकेत

शुक्रवार को सैन्य कार्रवाई शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने संकेत दे दिए थे कि अमेरिका जल्द जवाब देगा. पत्रकारों द्वारा संभावित कार्रवाई को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने केवल इतना कहा था कि "आपको जल्द ही पता चल जाएगा." इसके कुछ समय बाद अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया.

उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने भी दिया कड़ा संदेश

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने भी सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने युद्धविराम समझौते का पूरी तरह पालन किया है, लेकिन यदि ईरान को किसी बात पर आपत्ति थी तो बातचीत का रास्ता अपनाया जा सकता था. वैंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि ईरान हिंसा का रास्ता चुनता है तो उसे उसी भाषा में जवाब मिलेगा. उन्होंने तेहरान को आगे किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई से बचने की सलाह भी दी.

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर भी दिखाई देने लगा है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में गिना जाता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है.

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