menu-icon
The Bharatvarsh News

अंतरिम युद्धविराम पर संकट! अमेरिका-ईरान ने एक-दूसरे पर लगाए समझौता तोड़ने के आरोप

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम युद्धविराम पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं. दोनों देशों ने एक-दूसरे पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाया है. अमेरिका ने इस हमले के लिए सीधे ईरान को जिम्मेदार ठहराया, वहीं ईरान ने अमेरिकी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है.

Calendar Last Updated : 28 June 2026, 11:07 AM IST
Share:

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में लागू हुए अंतरिम युद्धविराम पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं. करीब चार महीने तक चले संघर्ष के बाद जिस समझौते से हालात सामान्य होने की उम्मीद जगी थी, वह अब एक सप्ताह के भीतर ही विवादों में घिर गया है. दोनों देशों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ा दी है. ताजा विवाद की शुरुआत तब हुई जब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक व्यावसायिक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ. 

अमेरिका ने इस हमले के लिए सीधे ईरान को जिम्मेदार ठहराया और इसे युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया. इसके बाद अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए. अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के अनुसार, इस अभियान में मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ-साथ तटीय रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया. सैन्य कार्रवाई पूरी होने के बाद सेना ने ऑपरेशन से जुड़ा वीडियो भी जारी किया और कहा कि यह कदम वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया.

अमेरिका ने क्या कहा?

सेंटकॉम का कहना है कि ईरान की ओर से वाणिज्यिक जहाज पर किया गया हमला अंतरिम समझौते के खिलाफ था. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, जवाबी कार्रवाई पूरी तरह आवश्यक थी और इसका उद्देश्य भविष्य में ऐसे हमलों को रोकना है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने भी सरकार के फैसले का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने युद्धविराम की सभी शर्तों का पालन किया है और यदि किसी पक्ष को कोई शिकायत थी तो उसे बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए था. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की हिंसक कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा.

ईरान ने अमेरिका के आरोपों को किया खारिज

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी हमले में दक्षिणी बंदरगाह सिरिक के आसपास के इलाके को निशाना बनाया गया, जबकि ईरानी बल केवल समुद्री नियमों का पालन करवा रहे थे. सरकारी मीडिया के अनुसार, नौवहन नियमों के कथित उल्लंघन के बाद पहले चेतावनी दी गई थी और उसके बाद सीमित कार्रवाई की गई. ईरान का दावा है कि यह कदम सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा था, न कि युद्धविराम तोड़ने की कोशिश.

जवाबी कार्रवाई की दी चेतावनी

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाब दिया है. संगठन ने बयान जारी कर कहा कि यदि अमेरिका ने आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रखी तो उसका और अधिक व्यापक जवाब दिया जाएगा. गार्ड्स का यह भी कहना है कि युद्धविराम समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के अधिकारों को स्वीकार किया गया था. उनका आरोप है कि अमेरिका जानबूझकर तनाव बढ़ाकर इस व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है. ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर समझौते की भावना का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया और कहा कि हालिया घटनाएं अमेरिका की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करती हैं.

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

पूरा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी जुड़ा हुआ है. यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा गुजरती है. युद्धविराम के बाद ईरान ने इस जलमार्ग पर निगरानी और नियंत्रण की बात कही थी, जबकि अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि यहां अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के जारी रहनी चाहिए.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खाड़ी देशों के नेताओं के साथ बैठक के बाद कहा था कि इस समुद्री मार्ग पर किसी भी देश का एकाधिकार स्वीकार नहीं किया जा सकता. वहीं ईरान ने जवाब देते हुए कहा कि इस क्षेत्र के संचालन में उसकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

एक मोर्चे पर तनाव, दूसरे पर कूटनीतिक पहल

जहां अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है, वहीं क्षेत्र में एक अन्य महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल भी सामने आई है. अमेरिका की मध्यस्थता में इज़राइल और लेबनान के बीच एक ढांचागत समझौते पर सहमति बनी है, जिसका उद्देश्य सीमा पर लंबे समय से जारी टकराव को कम करना है. हालांकि, ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है और चेतावनी दी है कि यदि इसे लागू करने की कोशिश की गई तो क्षेत्र में नए संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है.
 

सम्बंधित खबर

Recent News