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क्या बच्चों को भी मिलनी चाहिए इच्छामृत्यु? नीदरलैंड के इस ऐतिहासिक कदम ने दुनियाभर में छेड़ी नई बहस

नीदरलैंड से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी के होश उड़ा दिए है. पहली बार एक बच्चे को कानूनी प्रक्रिया के तहत इच्छामृत्यु (यूथेनेशिया) दी गई है. देश की स्वास्थ्य मंत्री ने वार्षिक रिपोर्ट में इस मामले की जानकारी दी है.

Calendar Last Updated : 27 June 2026, 04:25 PM IST
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नई दिल्ली: हाल ही में नीदरलैंड से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी के होश उड़ा दिए है. बता दें, पहली बार 12 वर्ष से कम आयु के एक बच्चे को कानूनी प्रक्रिया के तहत इच्छामृत्यु (यूथेनेशिया) दी गई है. यह मामला वर्ष 2024 में लागू किए गए नए कानून के बाद सामने आया पहला मामला माना जा रहा है. संशोधित नियमों के अनुसार, 1 से 12 वर्ष तक के उन बच्चों को इच्छामृत्यु की अनुमति दी जा सकती है, जो असाध्य बीमारी से जूझ रहे हों, असहनीय पीड़ा में हों और जिनके स्वस्थ होने की कोई चिकित्सीय संभावना न बची हो.

स्वास्थ मंत्री ने दी जानकारी 

जानकारी के अनुसार, देश की स्वास्थ्य मंत्री सोफी हरमंस ने संसद में सरकार की वार्षिक रिपोर्ट पेश करते हुए इस मामले की जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि संबंधित बच्चे को पिछले वर्ष कानूनी प्रक्रिया के तहत इच्छामृत्यु दी गई थी. हालांकि, गोपनीयता बनाए रखने के लिए बच्चे की पहचान, उम्र और बीमारी से जुड़ी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब सरकारी प्रासीक्यूटर इस पूरे मामले की समीक्षा करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर ने कानून में निर्धारित सभी नियमों और शर्तों का पूरी तरह पालन किया था या नहीं.

इसके साथ ही सरकार के अनुसार, इच्छामृत्यु केवल गंभीर और लाइलाज चिकित्सा स्थितियों में ही दी जा सकती है. केवल जीवन से निराश होना या यह महसूस करना कि जीवन पूरा हो चुका है, इच्छामृत्यु की अनुमति पाने का आधार नहीं माना जाएगा.

क्या है इच्छामृत्यु के नियम 

कानूनी प्रक्रिया के तहत डॉक्टरों को यह सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है कि मरीज असहनीय दर्द झेल रहा है, उसके ठीक होने की कोई संभावना नहीं है और उसे उसकी स्वास्थ्य स्थिति की पूरी जानकारी दी गई है. इसके अलावा यह भी जरूरी है कि उपचार का कोई प्रभावी विकल्प उपलब्ध न हो. डॉक्टर को एक स्वतंत्र चिकित्सक की राय भी लेनी होती है और 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के मामले में माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति अनिवार्य होती है.

कब मिली थी इस कानून को मान्यता 

बता दें, नीदरलैंड साल 2002 में इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता देने वाला दुनिया का पहला देश बना था. वहीं, बेल्जियम ने 2014 में सभी आयु वर्ग के बच्चों के लिए भी कुछ निर्धारित शर्तों के साथ इच्छामृत्यु को कानूनी मंजूरी दे दी थी. नीदरलैंड सरकार का अनुमान है कि नए कानून के तहत हर साल करीब पांच से दस बच्चों के मामलों में इस प्रावधान का इस्तेमाल किया जा सकता है.

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