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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी ने पूरे क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है. एक तरफ अमेरिका की ओर से ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित कार्रवाई की चर्चा है, तो दूसरी ओर तेहरान ने भी साफ कर दिया है कि यदि उस पर हमला हुआ, तो वह इसका जवाब मध्य पूर्व के अहम तेल और गैस केंद्रों को निशाना बनाकर देगा. इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में नए संघर्ष की आशंका को और तेज कर दिया है.
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम न्यूज के मुताबिक, तेहरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ऊर्जा ढांचे पर नए हमले का आदेश देते हैं, तो उसका जवाब कड़ा होगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पहले से व्यापक रणनीति तैयार कर ली है. यदि अमेरिका या इजरायल सैन्य कार्रवाई करते हैं, तो क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है.
तस्नीम की रिपोर्ट में जिन स्थानों का उल्लेख किया गया है, उनमें सऊदी अरब का घावर तेल क्षेत्र, अब्काइक और खुराइस उत्पादन केंद्र शामिल हैं. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात का जाकुम तेल क्षेत्र और रुवैस रिफाइनरी, कतर का नॉर्थ फील्ड और रास लफान गैस केंद्र, कुवैत का बुर्गन तेल क्षेत्र, बहरीन की सित्रह रिफाइनरी और इजरायल के लेवियाथन तथा तमार गैस क्षेत्र भी संभावित निशानों में बताए गए हैं. ये सभी ऊर्जा केंद्र वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं.
रिपोर्ट में एक वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि किसी भी संभावित अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है. अधिकारी ने यह भी दावा किया कि पिछले 40 दिन के संघर्ष के दौरान ईरान ने कतर की एक महत्वपूर्ण गैस रिफाइनरी को निशाना बनाया था. उनके अनुसार, इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर प्रतिक्रिया भी दी थी.
इसी बीच एक अमेरिकी अधिकारी ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के ऊर्जा और अन्य अहम ढांचागत ठिकानों पर कार्रवाई के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं लिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का उद्देश्य ईरान पर दबाव बढ़ाना है ताकि वह संघर्ष विराम वार्ता में अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करे. साथ ही, इस संभावित अभियान में इजरायल की भूमिका भी अहम मानी जा रही है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.