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अमेरिका और ईरान ने ऐतिहासिक शांति समझौते पर किए हस्ताक्षर, थमा सालों का तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस समझौते का प्राथमिक उद्देश्य दोनों देशों के बीच जारी युद्ध को पूरी तरह विराम देना और क्षेत्र में शांति बहाल करना है.

Calendar Last Updated : 18 June 2026, 09:38 AM IST
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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में महीनों से जारी खूनी संघर्ष और भारी सैन्य तनाव को समाप्त करने की दिशा में एक युगांतकारी और ऐतिहासिक सफलता मिली है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस समझौते का प्राथमिक उद्देश्य दोनों देशों के बीच जारी युद्ध को पूरी तरह विराम देना और क्षेत्र में शांति बहाल करना है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से इस बात की पुष्टि की है. यह समझौता गहन कूटनीतिक वार्ताओं और प्रशासनिक प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है.

पर्दे के पीछे की कूटनीति और रणनीतिक कदम

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस शांति समझौते की रूपरेखा को अंतिम रूप पहले ही दे दिया गया था. शुरुआती प्रक्रिया के तहत बीते रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बकर कलीबाफ ने इस मसौदे पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षर किए थे. इस पूरी डिजिटल हस्ताक्षर प्रक्रिया के दौरान स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसके गवाह बने थे.

मसूद पेजेशकियन ने खुद इस पर हस्ताक्षर किए

रविवार को प्रशासनिक स्तर पर मिली इस सफलता के बाद, बुधवार को दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने खुद इस पर हस्ताक्षर किए. इस सर्वोच्च राजनीतिक कदम ने अब इस शांति समझौते को वैश्विक स्तर पर औपचारिक और कानूनी रूप से सुदृढ़ कर दिया है.

प्रक्रियाएं पूरी कब होगी

समझौते की आधिकारिक घोषणा से पहले बुधवार शाम अमेरिका द्वारा शांति समझौते का अंतिम मसौदा पेश किया गया था. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी संकेत दिए थे कि दोनों देशों के प्रमुख इस डील पर अंतिम मुहर लगा रहे हैं. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 19 जून को स्विट्जरलैंड में दोनों पक्षों के बीच इस ऐतिहासिक दस्तावेज पर औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी.

शांति समझौते की प्रमुख और महत्वपूर्ण शर्तें

इस समझौता ज्ञापन के तहत दोनों देशों ने कई संवेदनशील और रणनीतिक बिंदुओं पर सहमति जताई है. समझौते के तहत लेबनान सहित अन्य सभी सक्रिय और टकराव वाले मोर्चों पर तत्काल और स्थायी युद्धविराम लागू किया जाएगा. इसके साथ ही दोनों राष्ट्र एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का पूर्ण सम्मान करेंगे तथा एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का दखल नहीं देंगे. अंतिम व्यापक समझौते पर पूरी सहमति बनाने के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है, जिसे आपसी विचार-विमर्श से आगे बढ़ाया जा सकता है.

नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह हटाया जाएगा

आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर भी बड़े फैसले लिए गए हैं. इसके तहत अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह हटाया जाएगा और ईरान के व्यापारिक मामलों में वाशिंगटन का हस्तक्षेप बंद होगा. आगामी 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक पोतों की आवाजाही को पूरी तरह बहाल किया जाएगा.

परमाणु हथियार नहीं बनाएगा

इसके बदले में अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की एक व्यापक आर्थिक विकास योजना की पेश करेंगे और ईरान पर पहले से लागू सभी तरह के कड़े आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को तरीके से हटा दिया जाएगा. परमाणु सुरक्षा के मामले में ईरान ने प्रतिबद्धता जताई है कि वह किसी भी प्रकार का परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, जबकि संवर्धित यूरेनियम के प्रबंधन पर अंतिम समझौते से पहले दोनों देशों के बीच चर्चा की जाएगी.

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