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लंदन में भारी प्रदर्शन, टॉमी रॉबिन्सन के नेतृत्व में विशाल आव्रजन विरोधी रैली

टॉमी रॉबिन्सन, जिनका असली नाम स्टीफन याक्सली-लेनन है, ने रैली में अपने प्रवासी-विरोधी और इस्लाम-विरोधी विचारों को फिर से दोहराया. उन्होंने दावा किया कि प्रवासियों को ब्रिटिश नागरिकों से अधिक अधिकार मिले हैं.

Calendar Last Updated : 14 September 2025, 10:14 AM IST
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London Anti Immigration Rally: लंदन की सड़के पर आज यानी शनिवार को भारी प्रदर्शन देखने को मिला . दक्षिणपंथी कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन की 'यूनाइट द किंगडम' रैली में करीब लाखों समर्थक शामिल हुए. यूनियन जैक और सेंट जॉर्ज क्रॉस के झंडे लहराते हुए लोग 'नावों को रोको' और 'उन्हें घर भेजो' जैसे आव्रजन-विरोधी नारे लगाते रहे. दूसरी ओर, 'मार्च अगेंस्ट फ़ासीज़्म' नामक प्रति-प्रदर्शन में 5,000 लोग शामिल हुए, जिन्होंने 'शरणार्थियों का स्वागत है' और 'दक्षिणपंथ को कुचल दो' के नारे लगाए.

प्रदर्शन की शुरुआत में माहौल शांत रहा, लेकिन दोपहर बाद तनाव बढ़ गया. रॉबिन्सन के कुछ समर्थकों ने प्रति-प्रदर्शनकारियों पर बोतलें और फ्लेयर्स फेंके. व्हाइटहॉल पर पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश भी की गई. मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लात-घूंसे बरसाए. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. मौके पर नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने चेतावनी दी है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

रॉबिन्सन का विवादित संदेश  

टॉमी रॉबिन्सन, जिनका असली नाम स्टीफन याक्सली-लेनन है, ने रैली में अपने प्रवासी-विरोधी और इस्लाम-विरोधी विचारों को फिर से दोहराया. उन्होंने दावा किया कि प्रवासियों को ब्रिटिश नागरिकों से अधिक अधिकार मिले हैं. रैली में यूरोप के कई अति-दक्षिणपंथी नेता भी शामिल हुए, जिनमें फ्रांसीसी राष्ट्रवादी एरिक ज़ेमोर भी थे. ज़ेमोर ने 'महान प्रतिस्थापन' सिद्धांत को दोहराया. एलन मस्क ने भी वीडियो संदेश के जरिए ब्रिटेन सरकार की आलोचना की और अनियंत्रित प्रवासन को ब्रिटेन की पहचान के लिए खतरा बताया.

आव्रजन पर गहराता विवाद  

यह प्रदर्शन ब्रिटेन में आव्रजन को लेकर बढ़ते तनाव को दर्शाता है. इस साल 28 हजार से अधिक प्रवासी छोटी नावों से इंग्लिश चैनल पार कर चुके हैं. इससे शरण व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है और राष्ट्रवादी अभियान तेज हुए हैं. रॉबिन्सन के समर्थकों ने इस रैली को राष्ट्रीय गौरव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतीक बताया, जबकि आलोचकों ने इसे ज़ेनोफोबिया और अतिवाद का प्रदर्शन करार दिया. सड़कों पर ब्रिटिश, अमेरिकी और इज़राइली झंडे लहराए गए. कुछ प्रदर्शनकारी डोनाल्ड ट्रम्प की MAGA टोपियां पहने दिखे. तख्तियों पर प्रधानमंत्री कीर स्टारमर पर विश्वासघात के आरोप लगाए गए. प्रति-प्रदर्शनकारी 'खड़े हो जाओ, जवाबी कार्रवाई करो' के नारे लगाते रहे. रैली में अमेरिकी कार्यकर्ता चार्ली किर्क के लिए मौन रखा गया, और एक बैगपाइपर ने 'अमेज़िंग ग्रेस' बजाया.'यूनाइट द किंगडम' रैली में भीड़ बिग बेन से वाटरलू स्टेशन तक फैली. हालांकि, यह पिछले साल के फ़िलिस्तीनी समर्थक मार्च से छोटी थी, जिसमें 3,00,000 लोग शामिल हुए थे. पुलिस हिंसा की जांच कर रही है और और गिरफ्तारियों की चेतावनी दे रही है. यह प्रदर्शन दर्शाता है कि आव्रजन ब्रिटेन में सबसे विवादास्पद मुद्दा बन गया है, जो आर्थिक चिंताओं से भी आगे निकल चुका है.

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