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इजरायल-अमेरिका की साझेदारी मजबूत, लेकिन हर बात पर सहमति नहीं: नेतन्याहू

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का एक बयान सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपने संबंधों को लेकर बोलते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी है, लेकिन हर मुद्दे पर उनकी राय एक जैसी नहीं होती.

Calendar Last Updated : 22 June 2026, 01:05 PM IST
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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बदलते कूटनीतिक समीकरणों के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का एक बयान चर्चा का विषय बन गया है. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों को लेकर खुलकर अपनी बात रखी और साफ किया कि दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी होने के बावजूद हर मुद्दे पर उनकी राय एक जैसी नहीं होती. 

एक अंतरराष्ट्रीय नीति सम्मेलन को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के संबंध मजबूत हैं, लेकिन दोनों देश स्वतंत्र हैं और अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप उनकी हर इच्छा के अनुसार निर्णय लेते हैं या फिर वह स्वयं ट्रंप की हर बात मानते हैं. नेतन्याहू के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर सहमति होती है, लेकिन कुछ मामलों में अलग-अलग दृष्टिकोण भी सामने आते हैं. उन्होंने इस स्थिति को दो स्वतंत्र और आत्मनिर्भर देशों के बीच सामान्य संबंधों का हिस्सा बताया.

क्षेत्रीय हालात के बीच बयान की बढ़ी अहमियत

इजरायली प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं. इजरायल इस समय हमास, हिज्बुल्लाह और ईरान समर्थित समूहों से जुड़े कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रहा है. हालांकि अमेरिका लंबे समय से इजरायल का प्रमुख सहयोगी रहा है, लेकिन हर मुद्दे पर दोनों देशों की सोच पूरी तरह समान नहीं होती. कई बार अमेरिकी प्रशासन अपनी रणनीति और वैश्विक हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है, जबकि इजरायल अपनी सुरक्षा जरूरतों के अनुसार कदम उठाता है.

अमेरिका और ईरान के बीच चली 18 घंटे की बातचीत

दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संवाद को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है. ईरान की सरकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच करीब 18 घंटे तक बातचीत हुई, जिसमें कई अहम विषयों पर चर्चा की गई. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि बातचीत का यह चरण फिलहाल पूरा हो गया है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि वार्ता प्रक्रिया समाप्त हो गई है. अब तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें आगे के काम को आगे बढ़ाएंगी और विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा करेंगी.

कतर और पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका

इस पूरी प्रक्रिया में कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है. दोनों देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच संवाद बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. जानकारी के अनुसार, बातचीत के दौरान जिन मुद्दों पर सहमति बनी है, उन्हें एक लिखित दस्तावेज के रूप में तैयार किया जाएगा. इस दस्तावेज में उन प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख होगा, जिन पर दोनों पक्षों ने सकारात्मक प्रगति दर्ज की है. इसे आगे की वार्ताओं के लिए आधार माना जा सकता है.

ईरान ने रखीं दो प्रमुख मांगें

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर ईरान विशेष रूप से जोर दे रहा है. इनमें सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात से जुड़ा मामला है. ईरान चाहता है कि उसके तेल व्यापार पर लगी बाधाओं को कम किया जाए ताकि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने तेल की बिक्री सामान्य रूप से कर सके. दूसरी बड़ी मांग ईरान की विदेशी बैंकों और अन्य देशों में जमा उन संपत्तियों से जुड़ी है, जो विभिन्न प्रतिबंधों के कारण लंबे समय से उपयोग में नहीं लाई जा सकी हैं. ईरान का कहना है कि इन वित्तीय संसाधनों तक उसकी पहुंच बहाल की जानी चाहिए.

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