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क्या पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमानों को अमेरिकी हमलों से बचाया? रिपोर्ट में हुआ खुलासा

पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान ईरानी सैन्य विमानों को अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए अपने नूर खान हवाई अड्डे पर खड़ा करने की अनुमति दी. अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल उठाते हुए उसकी पूरी समीक्षा की मांग की है.

Calendar Last Updated : 12 May 2026, 08:07 AM IST
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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म कराने में मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने विवादास्पद कदम उठाया है. सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए अपने हवाई अड्डों पर खड़ा करने की अनुमति दे दी. यह जानकारी अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दी गई है.

नूर खान एयरबेस पर ईरानी विमान

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अप्रैल की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम की घोषणा के कुछ दिनों बाद ईरान ने पाकिस्तान के नूर खान हवाई अड्डे पर कई विमान भेजे. इनमें ईरानी वायुसेना का आरसी-130 टोही विमान भी शामिल बताया जा रहा है, जो लॉकहीड सी-130 हरक्यूलिस का खुफिया संस्करण है.

ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमानों को पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भी भेजने की कोशिश की. अफगानिस्तान के एक नागरिक उड्डयन अधिकारी ने बताया कि संघर्ष शुरू होने से ठीक पहले एक ईरानी विमान काबुल पहुंचा था. हालांकि, तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इस बात से इनकार किया. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में कोई ईरानी विमान नहीं है और ईरान को इसकी जरूरत भी नहीं थी.

पाकिस्तानी अधिकारी का इनकार

पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है. एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने सीबीएस न्यूज को बताया कि नूर खान एयरबेस शहर के बीचों-बीच स्थित है. इतने बड़े बेड़े को वहां छिपाना नामुमकिन है.

अमेरिकी सीनेटर का बयान

इस रिपोर्ट पर अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरी तरह से पुनर्मूल्यांकन की मांग की. 28 फरवरी से शुरू हुए और 8 अप्रैल को स्थगित इस युद्ध में पाकिस्तान मध्यस्थ बना हुआ था.

ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अगर रिपोर्ट सही है तो पाकिस्तान की भूमिका पर दोबारा विचार करना जरूरी होगा. उन्होंने ईरान के प्रति पाकिस्तानी अधिकारियों के कुछ पुराने बयानों का भी जिक्र किया.

दोनों पक्षों के बीच संतुलन

सीबीएस न्यूज के अनुसार, पाकिस्तान ने संकट के दौरान दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की. वह अमेरिका के सामने खुद को स्थिर मध्यस्थ के रूप में दिखाना चाहता था, लेकिन साथ ही ऐसे कदमों से बचता रहा जो ईरान या उसके मजबूत समर्थक चीन को नाराज कर दें.

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