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ट्रूडो सरकार का खालिस्तान समर्थकों के प्रति झुकाव! निज्जर हत्याकांड में भारतीय आरोपियों को सीधे ट्रायल

भारत-कनाडा के बीच रिश्ते और भी ज्यादा बिगड़ते जा रहे हैं. हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड मामले में ट्रूडो सरकार ने चार भारतीय आरोपियों के खिलाफ सीधा ट्रायल शुरू करने का फैसला लिया है. जिसका मतलब यह है कि इसे अब सीधा कनाडा के उच्चतम न्यालय में भेजा जाएगा.

Calendar Last Updated : 25 November 2024, 09:00 AM IST
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India-Canada Tension: भारत-कनाडा के रिश्ते दिन-प्रतिदिन और भी ज्यादा बिगड़ती जा रही है. ट्रूडो सरकार खालिस्तान समर्थकों के प्रति झुकाव लगातार बढ़ता जा रहा है. जिससे भारत और कनाडा के रिश्तों में और भी तनाव पैदा हो रहा है. हरदीप सिंह निज्जर की हत्याकांड मामले में कनाडा सरकार ने एक नया कदम उठाया है. जो दोनों देशों के रिश्तों में और भी गहराई से प्रभाव डाल सकता है.

हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में किसी ठोस सबूत के बिना भी कनाडा सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. कनाडा के बीसी प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने घोषणा की है कि चार भारतीय नागरिकों के खिलाफ बिना प्रारंभिक सुनवाई के सीधे ट्रायल शुरू किया जाएगा. इसका मतलब यह है कि अब इस मामले को सीधे कनाडा की सुप्रीम कोर्ट में भेजा जाएगा.

अटॉर्नी जनरल की जिम्मेदारी

कनाडा के क्रिमिनल कोड के तहत डायरेक्ट इंडिक्टमेंट यानी सीधे अभियोग लगाने का निर्णय बहुत कम मामलों में लिया जाता है. ऐसा निर्णय अक्सर संवेदनशील मामलों में, जैसे गवाहों की सुरक्षा या अन्य विशिष्ट मामलों में, लिया जाता है. यह फैसला अटॉर्नी जनरल की जिम्मेदारी होती है और यह जनहित से जुड़ी विशेष परिस्थितियों में ही लिया जाता है.

इन चार आरोपियों का नाम 

इस मामले में आरोपी चार भारतीय नागरिक हैं. जिनमें करण बरार, अमनदीप सिंह, कमलप्रीत सिंह और करणप्रीत सिंह शामिल हैं. इनपर 18 जून 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया स्थित गुरुद्वारे में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और हत्या की साजिश रचने का आरोप है. इन चारों को मई 2023 में गिरफ्तार किया गया था. लेकिन अब तक न्यायिक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ी है. इस मामले की सुनवाई अब तक पांच बार टल चुकी है. मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी 2025 को तय की गई है.

द्विपक्षीय संबंधों में कड़वाहट

कनाडा का यह फैसला भारत और कनाडा के रिश्तों को और अधिक खराब कर सकता है. जस्टिन ट्रूडो की सरकार का खालिस्तान के प्रति झुकाव और इस मामले को सबूतों की कमी के बावजूद राजनीतिक रंग देना द्विपक्षीय संबंधों में और भी कड़वाहट बढ़ा सकता है. भारत ने पहले ही इस मुद्दे पर सख्त प्रतिक्रिया दी है, और कनाडा सरकार का यह नया कदम भारत के लिए और भी विवादास्पद हो सकता है.

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