चेहरे की झुर्रियां सिर्फ क्रीम से नहीं जातीं! जानिए उम्र बढ़ने का असली कारण

अक्सर लोग मानते हैं कि चेहरे पर बढ़ती उम्र के निशान सिर्फ त्वचा से जुड़े होते हैं, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा गहरी और अलग है. झुर्रियां और ढीलापन केवल बाहरी बदलाव नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही कई प्रक्रियाओं का परिणाम होते हैं.

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Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: अक्सर लोग मानते हैं कि चेहरे पर बढ़ती उम्र के निशान सिर्फ त्वचा से जुड़े होते हैं, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा गहरी और अलग है. झुर्रियां और ढीलापन केवल बाहरी बदलाव नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही कई प्रक्रियाओं का परिणाम होते हैं. यही वजह है कि केवल क्रीम या सतही उपचार से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सकता.

अब इस पर एक एक्सपर्ट ने अपनी राय रखते हुए कहा कि उम्र बढ़ने की शुरुआत त्वचा के नीचे की परतों से होती है, जिसमें हड्डियां, वसा और कोलेजन जैसे तत्व शामिल होते हैं.

हड्डियों की संरचना में बदलाव

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि चेहरे की हड्डियां उम्र के साथ स्थिर नहीं रहतीं. समय के साथ ऊपरी जबड़े की हड्डी कमजोर होती है और निचले जबड़े का आकार बदलता है. इससे चेहरे के ऊतकों (टिशु) को मिलने वाला सहारा कम हो जाता है और ढीलापन बढ़ने लगता है.

वसा के वितरण में परिवर्तन

चेहरे का फैट भी उम्र के साथ अपना स्थान बदलती है. गहरी परतों की वसा कम हो जाती है, जबकि ऊपरी परत नीचे की ओर खिसकने लगती है. इसका असर चेहरे पर सूजन, गड्ढे और झुर्रियों के रूप में दिखाई देता है.

त्वचा और कोलेजन की भूमिका

उम्र बढ़ने के साथ त्वचा की अंदरूनी परत पतली होने लगती है और कोलेजन का बनना धीमा हो जाता है. इलास्टिन के टूटने से त्वचा की लचक कम होती है, जिससे वह ढीली और कमजोर नजर आने लगती है.

अल्ट्रावॉयलेट रेज का प्रभाव

धूप में मौजूद यूवी किरणें एजिंग को तेज करती हैं. ये कोलेजन को नुकसान पहुंचाती हैं और त्वचा की संरचना को कमजोर करती हैं, जिससे उम्र के लक्षण जल्दी दिखने लगते हैं.

एजिंग को धीमा करने के उपाय

विशेषज्ञ के अनुसार, संतुलित प्रोटीन आहार, नियमित व्यायाम, विटामिन डी, और सनस्क्रीन का उपयोग एजिंग को धीमा कर सकते हैं. इसके अलावा पर्याप्त पानी पीना, तनाव कम रखना और 7-8 घंटे की नींद लेना भी जरूरी है.

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