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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी टकराव के चलते वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है. भारत समेत कई देश हालात सामान्य होने और इस अहम समुद्री मार्ग के खुलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इसके उलट हालात और ज्यादा गंभीर होते दिखाई दे रहे हैं.
अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकाबंदी को और सख्त कर दिया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले व्यापारिक जहाजों की निगरानी बढ़ा दी गई है और 89 कमर्शियल जहाजों का रूट बदल दिया गया है. इस कदम के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव और बढ़ गया है.
सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों से होने वाले व्यापारिक आवागमन को रोकने के लिए कार्रवाई कर रही है. सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा, अमेरिकी नाकाबंदी को पूरी तरह लागू किया जा रहा है. ईरानी बंदरगाहों से होने वाले व्यापारिक आवागमन को रोका जा रहा है. अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए 89 वाणिज्यिक जहाजों को दूसरे रास्तों पर भेजा गया है. अमेरिकी सेना ने यह भी दावा किया कि चार जहाजों को निष्क्रिय किया गया है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है. खाड़ी देशों से तेल और गैस की सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट की आशंका तेज हो गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है.
दरअसल, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी. इसके बाद ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों पर जवाबी हमले किए. तनाव बढ़ने के बाद ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर दबाव बनाने के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी लागू कर दी. इसके चलते वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित होने लगी और दुनिया भर में चिंता बढ़ गई.
बढ़ते तनाव के बीच 8 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता से युद्धविराम लागू किया गया था. हालांकि, दोनों पक्षों के बीच स्थायी समझौता नहीं हो सका. बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्षविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने का ऐलान किया, लेकिन साथ ही ईरान के खिलाफ दोहरी समुद्री नाकाबंदी जारी रखी.
इसी बीच अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले को फिलहाल टालने की घोषणा के तुरंत बाद राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ एक गुप्त बैठक की. रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि सोमवार शाम ट्रंप ने शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा की. इस दौरान ईरान के खिलाफ सैन्य रणनीतियों और संभावित हमले के विकल्पों को लेकर विस्तृत ब्रीफिंग भी दी गई.
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता तनाव सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा. अगर समुद्री व्यापार और तेल-गैस सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित होती है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है.