नई दिल्ली: मकर संक्रांति भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो मौसम में होने वाले बदलाव और नई फसल के आगमन का प्रतीक माना जाता है. यह त्योहार देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, लेकिन एक बात हर जगह समान रहती है इस दिन तिल और गुड़ का सेवन.
तिल और गुड़ केवल परंपरा का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे सेहत से जुड़ी गहरी समझ भी छिपी हुई है. सर्दियों के मौसम में शरीर को अधिक ऊर्जा और गर्मी की जरूरत होती है, और तिल-गुड़ इस जरूरत को प्राकृतिक रूप से पूरा करते हैं.
तिल को दुनिया की सबसे पुरानी तिलहनों में से एक माना जाता है. पुराने समय से ही इसका उपयोग शरीर को शक्ति देने और ऊर्जा बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है. सर्दियों में पाचन क्रिया थोड़ी धीमी हो जाती है, ऐसे में तिल जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं और आसानी से पच भी जाते हैं.
तिल में प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाने और शरीर की ऊर्जा को बनाए रखने में मदद करती है. इसके अलावा, इसमें मौजूद स्वस्थ वसा सर्दियों में शरीर को गर्म रखने में सहायक होती है. यही कारण है कि मकर संक्रांति के दौरान तिल से बने व्यंजनों को खास महत्व दिया जाता है.
गुड़ तिल के साथ मिलकर इसके पोषण को और बढ़ा देता है. गुड़ में प्राकृतिक शर्करा और कई जरूरी खनिज पाए जाते हैं, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं. तिल और गुड़ का साथ में न केवल स्वादिष्ट लगते हैं, बल्कि यह लंबे समय तक शरीर को सक्रिय और ऊर्जा से भरपूर बनाए रखते हैं.
इसके साथ ही, तिल में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं, जिससे यह मिश्रण सर्दियों में और भी लाभकारी हो जाता है.
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ खाने की परंपरा यह दिखाती है कि हमारे त्योहार केवल रीति-रिवाज नहीं हैं, बल्कि मौसम के अनुसार शरीर की जरूरतों को समझकर बनाए गए हैं. बिना किसी मुश्किल तैयारी या सप्लीमेंट्स के, ये साधारण खाद्य पदार्थ बदलते मौसम में शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं.
यह मकर संक्रांति की सबसे लोकप्रिय मिठाइयों में से एक है. भुने हुए तिल और गुड़ से बने ये लड्डू लंबे समय तक रखे जा सकते हैं और थोड़ी मात्रा में ही भरपूर ऊर्जा देते हैं.
तिल और गुड़ से बनी यह पतली मिठाई सर्दियों में खूब पसंद की जाती है. इसे बनाना आसान होता है और यह लंबे समय तक खराब नहीं होती, इसलिए त्योहारों में इसे बांटना भी सुविधाजनक होता है.
महाराष्ट्र की यह पारंपरिक मिठाई नरम रोटी के अंदर तिल और गुड़ की भराई से बनाई जाती है. यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पेट भरने वाला और पौष्टिक व्यंजन है, जो सर्दियों के लिए उपयुक्त माना जाता है.