नई दिल्ली: दिल की सेहत को लेकर आजकल लोग पहले से कहीं ज़्यादा जागरूक हैं. बदलती जीवनशैली और खानपान के बीच अगर दिल सही तरह से काम करता रहे, तो यही सबसे बड़ी राहत है. लेकिन इस बदलती दुनिया में युवकों को भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता जा रहा है. ऐसे में जब भी हार्ट हेल्थ की बात होती है, ओमेगा-3 फैटी एसिड का नाम जरूर सामने आता है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर हमारे दिल के लिए मछली का तेल बेहतर है या अलसी का तेल?
दरअसल, मछली का तेल और अलसी का तेल दोनों ही ओमेगा-3 के अच्छे स्रोत माने जाते हैं. ये दिल को स्वस्थ रखने, सूजन कम करने और कोलेस्ट्रॉल संतुलन में मदद करते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि दोनों के पोषक तत्व और शरीर पर असर अलग-अलग तरीके से काम करते हैं.
ओमेगा-3 फैटी एसिड हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद अहम माना जाता है. यह धमनियों को लचीला बनाए रखने, खराब वसा को नियंत्रित करने और दिल पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करने में सहायक होता है. इसी वजह से डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ इसे नियमित आहार का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं.
मछली के तेल में EPA और DHA नाम के दो खास ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं. ये तत्व शरीर में बिना बदले सीधे असर करते हैं. शोध बताते हैं कि ये ट्राइग्लिसराइड कम करने और हृदय संबंधी जोखिम घटाने में मददगार हो सकते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से हार्ट से जुड़ी परेशानियां हैं.
अलसी के तेल में ALA नाम का पादप-आधारित ओमेगा-3 होता है. यह उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जो शाकाहारी या वीगन हैं. यह धीरे-धीरे शरीर में काम करता है और लंबे समय में दिल की सेहत को सहारा देता है. साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं.
अगर लक्ष्य स्पष्ट और चिकित्सकीय रूप से मजबूत हार्ट सपोर्ट है, तो मछली का तेल ज्यादा प्रभावी माना जाता है. वहीं, सामान्य स्वास्थ्य और पौधों पर आधारित जीवनशैली अपनाने वालों के लिए अलसी का तेल उपयुक्त है.