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नई दिल्ली: आज कल की दौड़ भाग वाले जीवन में लोगो का खान पान, रहन-सहन सब कुछ प्रभावित हो चुका है. लोगो के टाइम-बेटाइम कुछ भी अनाब शनाब खाने के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन इन समस्याओं में सबसे ज्यादा मोटावे की समस्या बढ़ रही है.
तो अगर आप भी वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसा नाश्ता चाहते हैं जो स्वाद के साथ-साथ शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा भी दे, तो सत्तू पराठा आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यह सिर्फ एक पारंपरिक व्यंजन नहीं, बल्कि सदियों में कम मेहनत में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला भोजन है. सत्तू का पराठा आपको लंबे समय तक एनर्जेटिक बनाए रखता है. आज जब हेल्दी और हाई-प्रोटीन डाइट की बात होती है, तो सत्तू पराठा फिर से चर्चा में है.
सत्तू की जड़ें को प्राचीन भारतीय खान-पान की परंपरा में जोड़कर देखा जाता है. जहां अनाज और दालों को भूनकर लंबे समय तक सुरक्षित बनाया जाता था. भुने चने से तैयार सत्तू जल्दी खराब नहीं होता और बिना ज्यादा पकाए भी खाया जा सकता है. इसी वजह से यह ग्रामीण जीवन में रोजमर्रा का अहम हिस्सा बना हुआ है.
सत्तू में प्राकृतिक रूप से प्रोटीन और फाइबर की भरपूर मात्रा होती है. ये दोनों तत्व भूख को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं और बार-बार खाने की इच्छा को कम करते हैं. सत्तू धीरे-धीरे पचता है, जिससे शरीर को लंबे समय तक स्थिर ऊर्जा मिलती है और अचानक थकान महसूस नहीं होती.
बिहार का यह पारंपरिक भोजन की पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसमें आयरन, मैग्नीशियम और बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन पाए जाते हैं, जो मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाते हैं. जब इसे साबुत गेहूं के आटे से बने पराठे में भरा जाता है और कम तेल में पकाया जाता है, तो यह संतुलित और हल्का भोजन बन जाता है.
सत्तू पराठा बनाने के लिए गेहूं के आटे का नरम गूंथ लिया जाता है. स्टफिन के लिए सत्तू में प्याज, हरी मिर्च, लहसुन, अजवाइन, नींबू का रस और हरा धनिया मिलाया जाता है. इस मिश्रण को ज्यादा गीला नहीं किया जाता ताकि पराठा बेलते समय फटे नहीं. इसके बाद पराठे को हल्के तेल या घी में मीडियम आंच पर सुनहरा होने तक पकाया जाता है.