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नींद में खर्राटे लेना सिर्फ आदत नहीं, हो सकता है हृदय के लिए जानलेवा; 20-30 की उम्र में दिल पर खतरा

हर रात गहरी नींद में खर्राटे लेना कई लोगों को सिर्फ एक आम आदत लगती है. लेकिन यह आपके स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी भी हो सकती है. अपने खर्राटों को नजरअंदाज करना हार्ट अटैक की वजह बन सकता है.

Calendar Last Updated : 28 January 2026, 11:52 AM IST
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नई दिल्ली: हर रात गहरी नींद में खर्राटे लेना कई लोगों को सिर्फ एक आम आदत लगती है, लेकिन यह आपके स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी भी हो सकती है. जिसे आम तौर पर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. कुछ चिकित्सक विशेषज्ञों के अनुसार, 20 और 30 वर्ष की उम्र में खर्राटे लेना हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं, जैसे दिल का दौरा, का संकेत हो सकता है. 

खर्राटे क्यों हैं हानिकारक?

आज के समय में आप अकसर सुनते होंगे कि नियमित जिम करते हुए या बाहर से फिट दिखने वाले युवाओं को एक झटके में हार्ट अटैक आता है और उनकी मौत हो जाती है. यह बेहद आम होता जा रहा है. इस पर एक विशेषज्ञ डॉक्टर ने बताया कि इसका मुख्य कारण सोते समय लगातार खर्राटे लेना भी हो सकता है. 

दरअसल शुरुआत में लोग खर्राटे आने को सामान्य मानते और मज़ाक उड़ाते हैं. लेकिन खर्राटे आने का अर्थ होता है नींद के दौरान बार-बार वायुमार्ग का संकुचित होना. इसका मतलब है कि हर बार सांस रुकने और फिर शुरू होने पर शरीर का ऑक्सीजन स्तर गिरता है और रक्तचाप अचानक बढ़ता है, जिससे हृदय पर लगातार दबाव पड़ता है. धीरे-धीरे ये रोजाना होना आपके दिल को नुकसान पहुंचाता है. 

खर्राटे को नजरअंदाज करना हो सकता है जानलेवा

लगातार खर्राटे को  नजरअंदाज करना आपके दिल के लिए नुकसानदायक हो सकता है. यही कारण है कि आजकल 20-30 की उम्र के लोग भी हृदय संबंधी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं. यह केवल तनाव या मोबाइल इस्तेमाल करने की वजह नहीं है, बल्कि शरीर की चेतावनी (खर्राटे) को नजरअंदाज करने की वजह से होता है. 

हृदय सुरक्षित रखने के सरल उपाय

हालांकि इन दिल के दौरे से कुछ आसान उपाय अपनाकर बहुत ही आासानी से बचा जा सकता है. 

  • मेडिकल चेकअप कराएं: खर्राटों की वजह और गंभीरता का पता लगाना जरूरी है.
  • सोने की पोजिशन में सुधार करें. पेट के बल सोने से वायुमार्ग पर दबाव बढ़ता है.
  • वजन को नियंत्रित में रखें. अतिरिक्त वजन खर्राटों और स्लीप एपनिया का मुख्य कारण बन सकता है.
  • खर्राटे, नींद के दौरान सांस रुकने और फिर शुरू होने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी पैदा करती है.

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