नई दिल्ली: आजकल जिम हो, ऑफिस हो या सोशल मीडिया हर जगह प्रोटीन की ही चर्चा है. प्रोटीन शेक, बार और सप्लीमेंट्स को ऐसे पेश किया जा रहा है मानो फिट और स्लिम रहने का यही एकमात्र रास्ता हो. लेकिन क्या सच में हमें इतने ज़्यादा प्रोटीन की ज़रूरत है, या यह सिर्फ एक अच्छी तरह से गढ़ा गया फूड ट्रेंड है? आज इस सवाल का जवाब सभी खोज रहे हैं. तो इस सवाल पोषण विशेषज्ञ ने अपना ज़मीनी नज़रिया रखा है.
पोषक विशेषज्ञ का मानना है कि आज प्रोटीन की कमी को लेकर जो डर फैलाया जा रहा है, वह वैज्ञानिक तथ्यों से ज़्यादा धारणा पर आधारित है. अगर आप घर का सामान्य, संतुलित भोजन खाते हैं, तो शरीर को ज़रूरी प्रोटीन अपने आप मिल जाता है. आपको प्रोटीन की पूर्ती के लिए अतिरिक्त प्रोटीन की आवश्यकता नहीं होती है.
साथ ही विशेषज्ञ चेतावनी भी देते हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा प्रोटीन लेने से फायदा नहीं, बल्कि नुकसान हो सकता है. अत्यधिक प्रोटीन सेवन से एसिडिटी, पेट फूलना और कब्ज जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. साथ ही, महंगे प्रोटीन सप्लीमेंट्स आपकी कमर पतली करने की गारंटी नहीं देते, लेकिन जेब ज़रूर हल्की कर देते हैं.
आज कल प्रोटीन केवल एक ट्रेंड बनकर रह गया है. जिसमें लोगों को प्रोटीन पोष्टिक तत्व खाने के लिए नहीं बनीं बल्कि यह फैशन होता जा रहा है. इसे फूड इंडस्ट्री की एक सोची-समझी रणनीति बताया जा रहा है. जब लोग ज्यादा प्रोटीन लेते हैं और पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ती हैं, तो उसी के समाधान के नाम पर फाइबर, प्रीबायोटिक्स और प्रोबायोटिक्स जैसे और प्रोडक्ट्स बेचे जाते हैं.
विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी एक पोषक तत्व के पीछे भागने के बजाय, दाल, अनाज, सब्ज़ी, फल और घी जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों से संतुलित भोजन अपनाया जाए. यही तरीका लंबे समय तक सेहतमंद रहने का सबसे भरोसेमंद रास्ता है. इसके साथ ही व्यायाम और फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए ताकि आपका शरीर उसे अच्छे से पचा सके.