नई दिल्ली: अरब सागर में उस वक्त हालात अचानक गंभीर हो गए, जब अमेरिकी नौसेना ने अपने अत्याधुनिक विमानवाहक पोत के नज़दीक उड़ रहे एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया. यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशें चल रही हैं. इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
मंगलवार को अमेरिकी सेना ने बताया कि मध्य पूर्व में तैनात विमानवाहक पोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' की ओर बढ़ रहे एक ईरानी ड्रोन को आत्मरक्षा में नष्ट किया गया. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह ड्रोन अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उड़ रहा था और चेतावनियों के बावजूद जहाज के काफी करीब आ गया था.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि ड्रोन 'आक्रामक तरीके से विमानवाहक पोत की दिशा में बढ़ रहा था और उसके इरादे स्पष्ट नहीं थे. हालात को देखते हुए, अब्राहम लिंकन से उड़ान भर रहे एफ-35सी लड़ाकू विमान ने ड्रोन को मार गिराया. नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स के मुताबिक, यह कदम पूरी तरह आत्मरक्षा और जहाज पर मौजूद कर्मियों की सुरक्षा के लिए उठाया गया.
अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया कि इस ऑपरेशन में न तो कोई अमेरिकी सैनिक घायल हुआ और न ही किसी सैन्य उपकरण को नुकसान पहुंचा. सेंटकॉम ने कहा कि बढ़ते क्षेत्रीय जोखिमों को देखते हुए यह फैसला जरूरी था.
वहीं, ईरान की एक न्यूज़ एजेंसी ने इस घटना को अलग नजरिए से पेश किया. एजेंसी के अनुसार, ड्रोन अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में निगरानी मिशन पर था और उड़ान के दौरान उससे संपर्क टूट गया. संपर्क टूटने के कारणों की जांच की जा रही है.
ड्रोन घटना के कुछ घंटों बाद, होर्मुज जलडमरूमध्य में भी तनाव देखा गया. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़ी नौकाएं एक अमेरिकी ध्वज वाले वाणिज्यिक टैंकर के करीब पहुंच गईं और उसे डराने की कोशिश की गई.