नई दिल्ली: इराक की राजनीति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को सख्त लहजे में चेतावनी देकर साफ कर दिया है कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी दोबारा इराक के प्रधानमंत्री बनते हैं, तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब इराक में सत्ता गठन को लेकर हलचल तेज है और क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं.
मंगलवार को ट्रंप ने कहा कि मलिकी की वापसी इराक के लिए 'बहुत बड़ी गलती' साबित होगी. उन्होंने संकेत दिया कि अगर मलिकी को फिर से सत्ता सौंपी गई, तो अमेरिका इराक को दिया जाने वाला हर तरह का समर्थन समाप्त कर देगा. मलिकी को देश के सबसे बड़े शिया राजनीतिक गठबंधन का समर्थन मिल रहा है, जिससे उनका नामांकन और भी अहम हो गया है.
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने लिखा कि मलिकी के पिछले कार्यकाल में इराक गरीबी, अस्थिरता और अराजकता में डूब गया था. उन्होंने कहा कि ऐसे हालात दोबारा नहीं दोहराए जाने चाहिए और इराक को इससे सबक लेना चाहिए.
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि मलिकी की नीतियां और उनकी विचारधारा अमेरिका के लिए स्वीकार्य नहीं हैं. उनके मुताबिक, अगर मलिकी प्रधानमंत्री बनते हैं, तो अमेरिका इराक को किसी भी तरह की सहायता नहीं देगा. ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी समर्थन के बिना इराक के लिए विकास, समृद्धि और स्वतंत्रता हासिल करना बेहद मुश्किल होगा.
गौरतलब है कि 2014 में अमेरिका के दबाव के बाद मलिकी को पद छोड़ना पड़ा था. उस समय उन पर सांप्रदायिक नीतियों को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे, जिन्हें इस्लामिक स्टेट के उभार का एक कारण माना गया.
अमेरिका का इराक पर प्रभाव सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक भी है. 2003 के अमेरिकी आक्रमण के बाद हुए समझौते के तहत इराक के तेल निर्यात से होने वाली अधिकांश आय न्यूयॉर्क स्थित फेडरल रिजर्व बैंक में जमा होती है. तेल राजस्व इराक की सरकारी आय का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा है.