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Ayodhya Ram Mandir: पहले प्रधानमंत्री करेंगे जटायु राज और कुबेरेश्वर महादेव की पूजा, फिर विराजमान होंगे रामलला

Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर के उद्घाटन में अब कुछ दिन ही बचे हैं और ऐसे में इसे लेकर तैयारियां जोरों पर है. जानें कौन हैं जटायु राज और कुबेरेश्वर महादेव जिनकी पूजा के बाद ही होगी रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा.

Calendar Last Updated : 24 December 2023, 02:59 PM IST
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हाइलाइट्स

  • जटायु ने ही सबसे पहले देखा था सीता-हरण
  • श्रीराम के आराध्य थे महादेव

Jatayu raaj aur Kubereshwar Mahadev Puja: अगले साल 22 जनवरी को रामलला सालों के वनवास के बाद एक बार फिर अपने भव्य मंदिर में विराजमान होंगे. इसे लेकर अयोध्या नगरी को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है. हर तरफ राम मंदिर के उद्घाटन और रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा की ही चर्चा हो रही है. इसके साथ ही धीरे-धीरे कार्यक्रम को लेकर जानकारियां सामने आ रही है.

पंडितों और विद्वानों ने बहुत शोध के बाद प्राण-प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त निकाला है. इसके लिए 22 जनवरी 2024 की दोपहर में 84 सेकंड का शुभ मुहूर्त बताया गया है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामलला के पूजन से पहले जटायु राज और कुबेरेश्वर महादेव की पूजा करेंगे. आइए जानते हैं कौन हैं  जटायु राज और कुबेरेश्वर महादेव जिनकी आराधना के बाद ही रामलला होंगे विराजमान. 

त्रेतायुग और प्रभु श्रीराम से है संबंध 

रामलला को विराजमान करने से पहले प्रधानमंत्री कुबेर नवरत्न टीला पर स्थापित जटायु राज की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे. इसके बाद वो शिवालय में भगवान कुबेरेश्वर महादेव का अभिषेक कर पूजन करेंगे. विद्वानों के अनुसार, रामलला को विराजमान करने से पहले जटायु राज और कुबेरेश्वर महादेव की पूजा करना बेहद महत्वपूर्ण है. इसका संबंध भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ा हुआ है.

जटायु ने ही दी थी सीता-हरण की जानकारी 

त्रेतायुग में संपाती और जटायु नाम के दो गरुड़ पक्षी थे. दोनों भाई थे और एक दूसरे से बेहद स्नेह रखते थे. जटायु और संपाती देव पक्षी अरुण के पुत्र थे. श्रीराम के पिता महाराज दशरथ एक बार शिकार पर गए थे. वहां उनकी भेंट इन दोनों गरुड़ भाइयों से हुई और वे दोनों महाराज दशरथ के मित्र बन गए.

इसके बाद जब वनवास के समय रावण माता सीता का हरण करके ले जा रहा था तो, जटायु ने ये देख लिया. जटायु ने रावण को रोकने की बहुत कोशिश की. लेकिन रावण ने जटायु का पंख ही काट दिया. इसके बाद माँ सीता की खोज में भटकते हुए श्रीराम जब जटायु के पास पहुंचे तो उन्होंने उसे मरणासन्न स्थिति में पाया. जटायु ने श्रीराम को सीता-हरण की पूरी बात बताई और वह दिशा भी बताई जिस तरफ रावण माता सीता को लेकर गया था.

लंका पर चढ़ाई से पहले श्रीराम ने की थी महादेव की पूजा 

आनंद रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम खुद महादेव की पूजा किया करते थे. सीता माता को लाने के लिए लंका पर चढ़ाई करने से पहले उन्होंने समुद्र किनारे शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी और विजयी होने के लिए आशीर्वाद लिया था. इसी मंदिर को आज रामेश्वरम मंदिर के नाम से जाना जाता है.

इसलिए भगवान राम के जीवन में महादेव की महात्मय को देखते हुए राम मंदिर परिसर में एक भव्य शिवालय भी बनाया गया है. कुबेर रत्न टीले पर बनाए जाने के कारण इस मंदिर को कुबेरेश्वर महादेव कहा जा रहा है. इसके साथ ही इसी मंदिर में जटायु राज की भी मूर्ति स्थापित की गई है.

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