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बैंगलुरु: 20 दिन में दो इंजीनियर, अतुल-प्रमोद की एक सी परेशानी एक ही अंत, आत्महत्या की दर्दनाक कहानी

अतुल सुभाष की आत्महत्या के ठीक 20 दिन बाद, बैंगलुरु में एक और सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रमोद ने पत्नी से परेशान होकर अपनी जान दे दी. दोनों घटनाएं बहुत हद तक एक जैसी हैं.

Calendar Last Updated : 02 January 2025, 05:12 PM IST
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अतुल सुभाष की आत्महत्या के ठीक 20 दिन बाद, बैंगलुरु में एक और सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रमोद ने पत्नी से परेशान होकर अपनी जान दे दी. दोनों घटनाएं बहुत हद तक एक जैसी हैं. 
कर्नाटक के बेंगलुरु में अतुल सुभाष की आत्महत्या का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक और सॉफ्टवेयर इंजीनियर, प्रमोद ने अपनी जान दे दी. जिस तरह अतुल ने अपनी आत्महत्या के लिए अपनी पत्नी और ससुराल वालों को जिम्मेदार बताया था, ठीक वैसे ही  प्रमोद की पत्नी पर भी आरोप लगाया गया.

दोनों घटनाओं की कहानी में समानता

अतुल और प्रमोद दोनों ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे. दोनों ने अपनी पत्नियों से परेशान होकर अपनी जान दे दी.
 9 दिसंबर को अतुल सुभाष ने अपने बैंगलुरु के फ्लैट में फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. मरने से पहले उसने 24 पन्नों का नोट छोड़ा था और एक वीडियो भी बनाया था. जिसमे उसने अपनी पत्नी, सांस और अपने साले को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया था. वहीं प्रमोद ने घर से बाहर जाने का बहाना बनाया और फिर घर नहीं लौटा. घर न आने पर उसके माता-पिता ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई. उसके बाद प्रमोद का शव मे मिला गया.

अतुल के केस में उसकी पत्नी निकिता, उसकी सास और उसके साले को गिरफतार किया जा चुका हैं. वे सभी हिरासत में हैं. इस मामले की सुनवाई बैंगलुरु के लोकल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट मे चल रही हैं. वहीं प्रमोद के केस में अभी कारवाई चल रही हैं. अभी तक किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया हैं.

अतुल सुभाष केस 

अतुल सुभाष ने मरने से पहले अपने नोट में लिखा था, मुझे मेरी बिवी और मेरे ससुराल वालों ने मरने के लिए मजबूर किया हैं. मुझ पर 9 से ज्यादा झूठे मुकदमे लगाए गए हैं, और मुझे मेरे बेटे से भी मिलने नहीं देते हैं. अब मैं ये सब सहन नहीं कर पा रहा हू इसलिए मैं ये कदम उठा रहा हूं.

प्रमोद का केस

दूसरी तरफ, प्रमोद का केस भी बहुत दुखद था. 29 दिसंबर को वो घर से बाहर गया और वापस लौटा ही नहीं. उसके घर ना आने पर उसके माता-पिता ने उसके गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई. बाद में प्रमोद की बाइक और उसकी बैंक पासबुक हेमावत नदी के पास मिली.
पासबुक पर लिखे पते से प्रमोद के घरवालो से संपर्क किया गया. और जैसे ही पुलिस ने बाइक के बारे में जानकारी दी, प्रमोद की पहचान हो गइ. फिर प्रमोद का शव नदी से निकाला गया.


प्रमोद बेंगलुरु की एक बेंज कंपनी में काम करता था, अपनी पत्नी के साथ हो रहे लगातार झगड़ों से वो तनाव में था. कहा जा रहा है प्रमोद को उसके भाई-बहन ने भी परेशान कर रखा था. इस सब से थककर उसने अपनी जान लेने का फैसला किया और नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली.

जब प्रमोद का शव नदी से बाहर निकाला गया, तो उसके परिवार वाले मौके पर पहुंच गए. प्रमोद की पत्नी, अपनी मां और बच्चों के साथ शव को देखने आई, लेकिन वहां एक नया विवाद शुरू हो गया. प्रमोद के परिजनों और पत्नी के परिजनों के बीच झगड़ा शुरू हो गया, जिसके बाद पुलिस को भीड़ को संभालने में परेशानी का सामना करना पड़ा. 

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