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बिहार: गुरुवार की सुबह बिहार के मुजफ्फरपुर में एक बहुत बड़ी और दुखद घटना घटी जब प्रसाद अस्पताल में एक बड़ी आग लग गई. इस आग ने तीन निर्दोष लोगों की जान ले ली और 20 से अधिक मरीज बुरी तरह से झुलस गए. रात लगभग 3 बजे पूरा अस्पताल नींद में था.
कैसे लगी आग
एक शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई और कुछ ही मिनटों में पूरे अस्पताल, जनरल वार्ड और गलियारों को अपनी चपेट में ले लिया. आसपास के लोगों ने बताया कि दम घोंटने वाले धुएं ने अस्पताल को घेर लिया। मरीज और डॉक्टर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. जिससे वहां भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई.
मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में देर रात भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। हादसे में 25 से अधिक मरीज प्रभावित हुए हैं, जबकि 10 लोगों की मौत की सूचना है। फायर ब्रिगेड की आठ गाड़ियों ने आग पर काबू पाया। https://t.co/b89DsCtH2V pic.twitter.com/NWhEiZV3F1
— Muzaffarpur Index (मुज़फ्फ़रपुर/𑂞𑂲𑂩𑂯𑂳𑂞) (@Index_Muz) June 4, 2026
दमकल विभाग की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही राहत दल और दमकल विभाग की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गई. दमकलकर्मियों ने बहुत ही सावधानी से अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालना शुरू किया. लोगों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया. जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि कुछ मरीजों की स्थिति बहुत गंभीर है. मृतक संख्या बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
लापरवाही के आरोप
इस दुखद घटना ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही और संवेदनहीनता के आरोप लगाए हैं. पीड़ित परिवारों का कहना है कि आग लगते ही अस्पताल का स्टाफ मरीजों को उनके हाल पर छोड़कर भाग गया. एक पीड़ित ने बताया कि उसके पिता आईसीयू में भर्ती थे. इस हादसे में उनकी मौत हो गई. लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने अभी तक उनका शव परिजनों को नहीं सौंपा है.
जांच और कार्रवाई
फायर ऑफिसर आर. एन. पांडेय ने बताया कि जब उनकी टीम सुबह 3 बजे के करीब पहुंची तो पूरा आईसीयू धुएं के गुबार से पैक था. संकट के उस दौर में अस्पताल का आपदा प्रबंधन स्टाफ नदारद था. इस पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है.
आग के कारण
जांच और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आग लगने का मुख्य कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है. वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी. जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले तीनों लोगों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. प्रशासन का मुख्य ध्यान अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों का सटीक रिकॉर्ड इकट्ठा करना और उनके वर्तमान स्थान का पता लगाना है.