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दिवाली से पहले जहरीली होने लगी दिल्ली की हवा, बेहद खराब कैटगरी में पहुंचा AQI

Delhi AQI Before Diwali: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, दिल्ली और आसपास के इलाकों में सोमवार को हवा की गुणवत्ता 'बेहद खराब' स्तर पर पहुंच गई. राष्ट्रीय राजधानी में सुबह का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 333 दर्ज किया गया.

Calendar Last Updated : 20 October 2025, 07:04 AM IST
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Delhi AQI Before Diwali: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, दिल्ली और आसपास के इलाकों में सोमवार को हवा की गुणवत्ता 'बेहद खराब' स्तर पर पहुंच गई. राष्ट्रीय राजधानी में सुबह का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 333 दर्ज किया गया. कुछ इलाकों में स्थिति और गंभीर हो गई, जहां एक्यूआई 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गया. विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली के मौके पर पटाखों और अन्य प्रदूषण स्रोतों के कारण हवा और खराब हो सकती है.

वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) हवा की गुणवत्ता को मापने का पैमाना है. 0-50 के बीच का एक्यूआई 'अच्छा', 51-100 'संतोषजनक', 101-200 'मध्यम', 201-300 'खराब', 301-400 'बेहद खराब' और 401-500 'गंभीर' माना जाता है. दिल्ली में सोमवार को कई क्षेत्रों में एक्यूआई 400 को पार कर गया, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है.

कुछ इलाकों में 'गंभीर' स्थिति  

वर्ल्ड एयर क्वालिटी इंडेक्स प्रोजेक्ट (एक्यूआईसीएन) के आंकड़ों के अनुसार, आनंद विहार में एक्यूआई 464 तक पहुंच गया. रोहिणी में यह 403 और सत्यवती कॉलेज के पास 432 रहा. इसके अलावा, आईटीओ (287), मेजर ध्यानचंद स्टेडियम (276), बुराड़ी क्रॉसिंग (266), परपरगा (252) और आईटीआई शाहदरा (247) में भी एक्यूआई 'खराब' श्रेणी में रहा. इन आंकड़ों से साफ है कि दिल्ली की हवा सांस लेने के लिए सुरक्षित नहीं रही. वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएसीयूएम) ने रविवार शाम को एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण को लागू किया. सीएसीयूएम के अनुसार, रविवार शाम 4 बजे दिल्ली का एक्यूआई 296 और रात 7 बजे 302 था. GRAP-2 के तहत कई सख्त कदम उठाए गए हैं. सड़कों पर धूल कम करने के लिए वैक्यूम स्वीपिंग और पानी का छिड़काव किया जा रहा है. निर्माण स्थलों की कड़ी निगरानी हो रही है ताकि धूल न फैले.

सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा  

प्रदूषण कम करने के लिए GRAP-2 के तहत सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई गई है. मेट्रो की आवृत्ति भी बढ़ाई जा रही है. ऑफ-पीक घंटों में यात्रा को प्रोत्साहित करने के लिए अलग-अलग किराया दरें लागू की गई हैं. इसके अलावा, खुले में कचरा या बायोमास जलाने पर रोक लगाने के लिए निवासी कल्याण संघों को कर्मचारियों के लिए इलेक्ट्रिक हीटर देने के निर्देश दिए गए हैं. दिल्ली में अब केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक या बीएस-VI डीजल बसों को ही प्रवेश की अनुमति है. अखिल भारतीय परमिट वाली पर्यटक बसों को छोड़कर अन्य बसों पर यह नियम लागू होगा.
 

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