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हमारी उदारता को कमजोरी ना समझे, NSA अजीत डोभाल ने दुश्मनों को दिया चेतावनी

ऑपरेशन सिंदूर' के लिए दिए गए विशेष इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की सहिष्णुता और उदारता को उसकी दुर्बलता मानने की भूल किसी को नहीं करनी चाहिए।

Calendar Last Updated : 14 August 2026, 05:17 PM IST
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नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने एक बार फिर भारत की सुरक्षा नीति और वैश्विक संदेश को पूरी स्पष्टता के साथ दुनिया के सामने रखा है। डिस्कवरी की बहुप्रतीक्षित दो-भागों वाली डॉक्यूमेंट्री सीरीज 'डीक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर' के लिए दिए गए विशेष इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की सहिष्णुता और उदारता को उसकी दुर्बलता मानने की भूल किसी को नहीं करनी चाहिए। डोभाल का यह वक्तव्य सैन्य अभियान की समाप्ति के बाद उनका पहला औपचारिक साक्षात्कार माना जा रहा है। 

डॉक्यूमेंट्री में दिखेगी सैन्य नेतृत्व की रणनीतिक सोच

डिस्कवरी चैनल और डिजिटल प्लेटफॉर्म डिस्कवरी प्लस पर शनिवार रात 9 बजे प्रसारित होने वाली इस डॉक्यूमेंट्री में भारत के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के उन प्रत्यक्ष अनुभवों को जगह दी गई है, जिन्होंने इस मिशन की रणनीति बनाई और पूरी निगरानी की।

इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में लिए गए कठिन फैसलों को भी सूक्ष्मता से रेखांकित किया गया है। 

88 घंटे का वह संघर्ष जिसने बदली सुरक्षा की परिभाषा 

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई की सुबह 'ऑपरेशन सिंदूर' की शुरुआत की थी। इस दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सक्रिय कई प्रमुख आतंकी बुनियादी ढांचों पर बेहद सटीक और घातक प्रहार किए। 
सीमा पार से हुई जवाबी हरकतों का भारत ने पूरी आक्रामकता से उत्तर दिया। दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच लगातार 88 घंटे तक चले इस कड़े टकराव का अंत आखिरकार 10 मई की शाम दोनों देशों के बीच बने आपसी कूटनीतिक समझौते के साथ हुआ था। 

दुश्मन के ठिकानों का खात्मा ही था प्राथमिक लक्ष्य

इंटरव्यू में अजीत डोभाल ने 88 घंटों तक चले इस अभूतपूर्व सैन्य अभियान की पृष्ठभूमि, रणनीतिक योजना और निर्णय प्रक्रिया पर गहराई से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन का केंद्र बिंदु दुश्मन के उन विशिष्ट ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त करना था, जिन्होंने पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले की साजिश रची थी। सुरक्षा तंत्र के इस सर्वोच्च अधिकारी ने दोटूक शब्दों में कहा कि वैश्विक समुदाय को यह समझना होगा कि आवश्यकता पड़ने पर भारत बड़े से बड़ा जोखिम उठाने और किसी भी अंजाम की परवाह किए बिना सीमाओं के पार करारा प्रहार करने में तनिक भी संकोच नहीं करेगा।

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